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नोएडा सेक्टर 63 में एक छोटी सी वर्कशॉप, जहां 100 साल के करीब पहुंच चुके राम वन जी सुतार की उंगलियां मिट्टी और कांस्य को छूकर इतिहास रचती हैं। 1925 में महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदूर गांव में जन्मे इस मूर्तिकार ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी कल्पना सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची विशाल प्रतिमा के रूप में दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बनेगी।
'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी'—जिसे नोएडा के इस वृद्ध कलाकार की उंगलियों ने साकार रूप दिया आज न सिर्फ पर्यटन का बुलंद केंद्र है, बल्कि गुजरात की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला एक राजस्व का स्रोत भी बन चुकी है। आइए, जानें कैसे एक आदमकद मूर्ति ऐतिहासिक पटेल की यह प्रतिमा पर्यटन और कमाई का ऐसा तूफान बन गई।
राम सुतार की जादुई उंगलियां: एक डिजाइन जो इतिहास से प्रेरित
राम सुतार का नाम भारत के मूर्तिकला जगत में सूरज की तरह चमकता है। पदम् भूषण से सम्मानित इस कलाकार ने 60 साल के करियर में 50 से ज्यादा मूर्तियां गढ़ीं, जिनमें महात्मा गांधी की कई प्रसिद्ध प्रतिमाएं शामिल हैं, जैसे संसद भवन की 17 फुट ऊंची ध्यानमग्न गांधी मूर्ति। लेकिन 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' उनकी सबसे बड़ी कृति है। 2010 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी कल्पना की, और 2013 में इतिहासकारों, कलाकारों व विद्वानों की टीम ने देशभर के पटेल की मूर्तियों का अध्ययन कर सुतार का डिजाइन चुना। यह डिजाइन अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लगी पटेल की मूर्ति का ही बड़ा संस्करण था।
सुतार बताते हैं कि उन्होंने नोएडा की अपनी स्टूडियो में पहले 30 फुट का मॉडल तैयार किया। फिर, उनके बेटे अनिल राम सुतार के साथ मिलकर चेहरे का विस्तार चीन में किया गया। पटेल को पारंपरिक धोती-शॉल में चित्रित किया गया, नर्मदा नदी की ओर देखते हुए, एक कदम बढ़ाते हुए, जैसे एकता का संदेश दे रहे हों। सुतार कहते हैं, "प्रकृति ही सबसे बड़ा गुरु है। मैंने पटेल की आंखों में वह दृढ़ता डाली जो उन्होंने 562 रियासतों को एकजुट करने में दिखाई।" यह डिजाइन गुजरात विधानसभा की 182 सीटों के सम्मान में 182 मीटर ऊंचा चुना गया।
निर्माण की अनोखी कहानी: किसानों का लोहा, इंजीनियरों का जादू
2013 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का चमत्कार था। लार्सन एंड टूब्रो (L&T) को 2,989 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला। सबसे अनोखा अभियान था 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी मूवमेंट'—2013 में किसानों से पुराने खेती के औजार दान करने का आह्वान। गुजरात के 1.6 लाख से ज्यादा किसानों ने 135 मीट्रिक टन स्क्रैप आयरन दान किया, जिसमें से 109 टन फाउंडेशन में इस्तेमाल हुआ। यह पटेल की किसान हितैषी छवि को सलाम था।निर्माण प्रक्रिया 33 महीनों में पूरी हुई। आधार 58 मीटर ऊंचा, कुल ऊंचाई 240 मीटर। 2,10,000 क्यूबिक मीटर कंक्रीट, 18,500 टन रिइंफोर्स्ड स्टील, 6,500 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 1,700 टन ब्रॉन्ज का इस्तेमाल। चीनी फाउंड्री जियांग्झी टोकाइन ने 12,000 ब्रॉन्ज पैनल्स बनाए। BIM टेक्नोलॉजी से 30 वैश्विक कंसल्टेंट्स ने मॉनिटरिंग की। दो 200 टन के ट्यून्ड मास डैम्पर्स ने इसे 180 किमी/घंटा हवा और 6.5 तीव्रता के भूकंप का सामना करने लायक बनाया। 3,400 मजदूरों और 300 इंजीनियरों ने 3.5 साल में इसे खड़ा किया। 31 अक्टूबर 2018 को पीएम मोदी ने उद्घाटन किया
पर्यटन का तूफान: लाखों पर्यटक, करोड़ों की चहल-पहल
एक छोटी सी आदमकद मूर्ति से क्या हो सकता है? लेकिन यह 'स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' ने साबित कर दिया। उद्घाटन के पहले साल ही 29 लाख पर्यटक आए, जो ताजमहल के सालाना औसत (68 लाख) से कम थे, लेकिन कमाई ज्यादा 82 करोड़ रुपये। 2023 तक 50 लाख विजिटर्स का रिकॉर्ड टूटा। 2025 तक, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कुल 1.6 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आ चुके हैं। दैनिक औसत 15,000 विजिटर्स—स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी के दोगुने! केवड़िया (अब एक्टा नगर) अब पर्यटन हब है। जंगल सफारी, अम्यूजमेंट पार्क, एडवेंचर जोन, बच्चों का न्यूट्रिशन पार्क, मिरर मेज, कैक्टस गार्डन, लेजर शो और नर्मदा पर बोटिंग। होटल, कन्वेंशन सेंटर, मेमोरियल गार्डन—सब कुछ फैमिली के लिए।
गुजरात टूरिज्म का फुटफॉल 5 करोड़ से बढ़कर 2020 तक 7.5 करोड़ होने का लक्ष्य पूरा हो चुका। पड़ोसी राज्यों और विदेशी पर्यटक आते हैं। यह अब शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की '8 वंडर्स' में शामिल है।
राजस्व का सैलाब: आर्थिक क्रांति का प्रतीक
पर्यटन सिर्फ घूमना नहीं, कमाई का स्रोत है। पहले साल 82 करोड़, 2019 के पहले 9 महीनों में 52.9 करोड़। मासिक सरप्लस 2.8 करोड़। टिकट (30-120 रुपये), बस, गैलरी एंट्री से कमाई। लेकिन असली कमाई पर्यटन इकोसिस्टम से—होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट, लोकल क्राफ्ट। 2025 तक अनुमानित 1 लाख करोड़ का आर्थिक इकोसिस्टम!
स्थानीय आदिवासी समुदाय को रोजगार मिला—गाइड, शॉपकीपर, ड्राइवर। 2,200 एकड़ क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर से रियल एस्टेट बूम। गुजरात की GDP में योगदान, सस्टेनेबल टूरिज्म से पर्यावरण संरक्षण। ताजमहल (सालाना 77 करोड़) से ज्यादा कमाई, लेकिन लागत वसूलने में 42 साल लगेंगे—फिर भी, यह निवेश है, नुकसान नहीं।
एकता का संदेश, विकास की मिसाल
राम सुतार की उंगलियों से गढ़ी यह मूर्ति सिर्फ पत्थर-लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि एकता, प्रगति और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक है। सरदार पटेल की तरह, यह भी देश को जोड़ रही है—पर्यटकों को, रोजगार को, राजस्व को। 2025 में, जब दुनिया इसे निहार रही है, तब भी सुतार जी कहते हैं : "मेरी उंगलियां इतिहास गढ़ती हैं, लेकिन एकता अमर रहती है।" यदि आप भी जाएं, तो नर्मदा किनारे खड़े होकर महसूस करें—यह सिर्फ मूर्ति नहीं, भारत का भविष्य है। अगर आपको मूर्तिकार राम वन जी सुतार से मिलना है तो सेक्टर 63 की अपनी इसी वर्कशॉप में इन्ही उंगलियों से अपनी सृजन की दुनिया मे नया कला का संसार रचने में लगे हैं।