मध्य प्रदेश में यूं तो अनेकों अनोखे रहस्यमई मंदिरों से भरा पड़ा है, लेकिन मप्र का खुजराहो एक यूं तो अपने पर्यटन स्थल की वजह से जाना जाता है, इसके साथ-साथ अपने पुराने मंदिरों की वजह से भी जाना जाता है। खजुराहो में देशी और विदेशी पर्यटकों का स्थल बन गया है । खजुराहो में एक मंदिर ऐसा भी है, जो साल में केवल 2 बार ही खुलता है। यह मंदिर देवीजी जी का है, देवी मां के इस मंदिर के पट सालभर की दो नवरात्रि में ही खोले जाते हैं। इस मंदिर में हर साल भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। 9वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बना यह मंदिर जगदंबा देवी का है। इस मंदिर का रहस्य अनोखा है, इस मंदिर में भक्तों की भारी आस्था रहती है। इसीलिए भक्त मंदिर के खुलने का सालभर इंतजार करते हैं।
मां जगदम्बा देवी के मंदिर का रहस्य
दरअसल, इस मंदिर का निर्माण चंदेलवंश के राजाओं ने करवाया था। लेकिन इतिहासकारों के मुताबिक पहले खुजराहो में केवल देवों के मंदिर बनाए जाते थे। मान्यता है कि देवों के मंदिर तभी पूर्ण माने जाते हैं, जब वहां देवी शक्ति का वास हो। शक्ति नहीं होने से पूर्णता नहीं मानी जाती थी । ऐसे में चंदेलवंश के राजाओं ने देवों के मंदिरों को पूर्ण रूप देने के लिए देवियों के भी मंदिर भी बनवाए, जिनमें से एक है देवी जगदंबी मंदिर । इस मंदिर से लगा हुआ एक मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित था, ऐसे में कालांतर इस मंदिर के गर्भ गृह में देवी जी की मूर्ति स्थापित की गई । जिसे देवी जगदंबा के रूप में प्रसिद्धि मिली। ऐसे में साल में केवल 2 बार आने वाली नवरात्रि में ही इस मंदिर को खोला जाता है।
होती है, कलश पूजा
पौराणिक मान्यताओं के हिसाब से चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना होती है, उसके बाद कलश पूजा होती है। मान्यता है कि कलश के अलग-अलग भागों में त्रिदेवों का वास होता है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश वास करते हैं, वहीं कलश के मध्य भाग में देवी शक्तियों का वास होता है। कलश की स्थापना करके देवी-देवताओं को घर आने का निमंत्रण दिया जाता है और नवरात्रि में पूजा पाठ शुरू किया जाता है।
यहां देवी जगदंबी मंदिर में 9 दिनों तक माता की आराधना की जाती है, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस मंदिर में खजुराहो के अन्य मंदिरों की तरह स्थापित कला का अनोखा रूप देखने को मिलता है, जहां बेहतरीन नक्काशी मंदिर में की गई है, जो यहां आने वाले पर्यटकों को खूब भाती है।