
14 साल पहले घर से निकली महिला को घर वालों ने मृत समझ कर किसी अज्ञात महिला का अंतिम संस्कार कर दिया। वही महिला नोएडा के अपनाघर में 14 साल बाद जब घरवालों को जिंदा मिल जाए उस समय परिजनों के निकलने वाले आंसुओं की संवेदना को समझना कैसा रहा होगा। पिछले दो वर्षों में ऐसी 238 महिलाओं को उनके घर वापस भेजा गया और परिजनों से पुनर्मिलन कराया।
नोएडा के सेक्टर-34 स्थित अपनाघर आश्रम ने एक बार फिर मानवता की सेवा में अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। आज आश्रम में त्रेता और द्वापर युग के वनवास की प्रतीकात्मक पुनरावृत्ति देखने को मिली, जब दो महिला 'प्रभुजी' अपने परिवारों से वर्षों बाद मिलीं। इन दोनों की कहानियां न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि रिश्तों की अहमियत को भी रेखांकित करती हैं।
14 वर्ष बाद 'मृत' समझी गई प्रभुजी की घर वापसी
पहली प्रभुजी 14 वर्ष पहले विक्षिप्त अवस्था में अपने घर से निकल गई थीं। परिजनों ने उनकी तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब पुलिस से उनकी जैसी एक लावारिस महिला का अंतिम संस्कार होने की खबर मिली, तो परिवार ने उनका विधिवत् क्रियाकर्म कर दिया। यह मान लिया गया कि वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन, अपनाघर आश्रम नोएडा की अथक सेवा और समर्पण ने इस कहानी को नया मोड़ दिया। गंभीर शारीरिक और मानसिक स्थिति में आश्रम पहुंची इस प्रभुजी को चिकित्सा, देखभाल और काउंसलिंग के जरिए स्वस्थ किया गया। आश्रम की टीम ने उनके परिवार का पता लगाया और परिजनों को सूचना दी। जब परिवार वाले आश्रम पहुंचे और अपनी 'खोई हुई' प्रियजन को जीवित देखा, तो उनकी आंखों में खुशी और आश्चर्य के आंसू छलक पड़े। यह पुनर्मिलन त्रेता युग के 14 वर्षीय वनवास की समाप्ति जैसा था।
12 वर्ष बाद दूसरी प्रभुजी की परिवार से मुलाकात
दूसरी प्रभुजी की कहानी भी कम प्रेरक नहीं है। 12 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी यह महिला दो वर्ष पहले वाराणसी के अपनाघर आश्रम से बाढ़ के कारण नोएडा आश्रम में स्थानांतरित की गई थीं। बेहद खराब शारीरिक और मानसिक स्थिति में पहुंची इस प्रभुजी को आश्रम की देखभाल ने नया जीवन दिया। आश्रम की टीम ने उनके परिवार का पता लगाकर संपर्क किया और परिजनों को नोएडा बुलाया। परिवार के साथ पुनर्वास का यह क्षण द्वापर युग के लंबे वनवास के अंत जैसा था, जहां रिश्तों की गर्माहट ने वर्षों की दूरी को पलभर में मिटा दिया।
अपनाघर आश्रम: रिश्तों को जोड़ने का पावन तीर्थ
अपनाघर आश्रम नोएडा ने मात्र दो वर्ष से कुछ अधिक समय में 238 महिला प्रभुजी को उनके परिवारों के साथ पुनर्वासित किया है। यह आश्रम न केवल बेसहारा लोगों को आश्रय देता है, बल्कि उनकी शारीरिक-मानसिक स्थिति को सुधारकर उनके परिवारों से मिलाने का पुण्य कार्य करता है। आश्रम में प्रवेश करते ही 'राधे-राधे' की गूंज और प्रेम भरा माहौल हर किसी का मन मोह लेता है। यहां प्रत्येक व्यक्ति को 'प्रभुजी' कहकर संबोधित किया जाता है, जो आश्रम के मानवता और सम्मान के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
रिश्तों की अहमियत और प्रेरणाये कहानियां हमें रिश्तों की गहराई और उनके महत्व को याद दिलाती हैं। अपनाघर आश्रम की यह पहल दर्शाती है कि कितनी भी विपरीत परिस्थितियां हों, प्रेम, देखभाल और विश्वास से हर खोया हुआ रिश्ता फिर से जीवंत हो सकता है। नोएडा आश्रम के संचालक बलराज गोयल और उनकी पत्नी शालिनी गोयल के नेतृत्व में यह संस्था बेसहारा लोगों के लिए एक नया घर और नई उम्मीद बनकर उभरी है।
टीम अपनाघर आश्रम नोएडा ने ठाकुर जी से प्रार्थना की है कि सभी प्रभुजी स्वस्थ और सुखी रहें। इस तरह की कहानियां समाज को प्रेरित करती हैं कि मानवता की सेवा और रिश्तों की डोर को मजबूत रखने से असंभव भी संभव हो सकता है। आश्रम की यह यात्रा न केवल बेसहारा लोगों के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है कि रिश्तों की कीमत को कभी नजरअंदाज न करें।