शादी के सीजन में सोशल मीडिया पर एक शादी का कार्ड जमकर वायरल हो रहा है। परंपरागत कार्ड्स से अलग इस खास निमंत्रण पत्र ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमतौर पर हिंदू शादियों के कार्ड्स में भगवान गणेश की तस्वीर देखने को मिलती है, लेकिन मध्यप्रदेश के गुना जिले के नाथूपुरा (रुठियाई) गांव से आया यह कार्ड इस परंपरा से हटकर है। इस कार्ड में सामाजिक न्याय, शिक्षा और समरसता के प्रतीक पांच महान शख्सियतों की तस्वीरें छापी गई हैं—डॉ. भीमराव आंबेडकर, गौतम बुद्ध, सवित्रीबाई फुले, बिरसा मुंडा और स्थानीय विधायक जयवर्धन सिंह। इस अनोखे कार्ड को छपवाने वाले हैं श्रीलाल सहरिया, जो आदिवासी समुदाय से हैं। उनका यह कदम अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
पारंपरिक सोच से अलग हटकर कार्ड डिजाइन
4 जून को हेमराज और हल्कीबाई की शादी है, और उनके पिता श्रीलाल सहरिया ने यह कार्ड छपवाया है। कार्ड में 'दूगेरिया परिवार का स्नेहिल आमंत्रण' लिखा गया है। लेकिन खास बात यह है कि इसमें धार्मिक प्रतीकों के बजाय सामाजिक नेताओं को प्राथमिकता दी गई है। यह सोच समाज में नई चेतना का संदेश देती है।
जयवर्धन सिंह की तस्वीर क्यों खास?
कार्ड में विधायक जयवर्धन सिंह की तस्वीर को देखकर लोग हैरान हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरी कहानी है। चार महीने पहले राघौगढ़ किले परिसर में जयवर्धन सिंह एक जनदर्शन कार्यक्रम कर रहे थे। वहीं एक युवक ने उन्हें अपनी शादी का कार्ड दिया, जिसमें सबसे ऊपर उनका फोटो था। यह बताता है कि स्थानीय लोग उन्हें कितना सम्मान और आदर्श मानते हैं।
सामाजिक चेतना को करता है उजागर
इस कार्ड में छपी तस्वीरें सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और संघर्ष का प्रतीक हैं। डॉ. आंबेडकर, गौतम बुद्ध, सवित्रीबाई फुले और बिरसा मुंडा ने समाज में बदलाव की मिसालें पेश की हैं। इनकी तस्वीरों का शादी के कार्ड पर होना यह दिखाता है कि अब समाज में वैचारिक बदलाव की लहर चल पड़ी है।
सोशल मीडिया पर हो रही जमकर चर्चा
कार्ड की फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस अनोखी पहल की तारीफ कर रहे हैं और इसे "सोच में बदलाव" का प्रतीक बता रहे हैं। खासकर युवाओं के बीच यह कार्ड चर्चा का विषय बना हुआ है।
परिवार का जुड़ाव विचारधारा से
श्रीलाल सहरिया और उनका परिवार आदिवासी समुदाय से आता है, और वे इन विचारधाराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि शादी जैसे पवित्र अवसर पर वे अपने आदर्शों को लोगों के सामने लाना चाहते थे।