मवाना में आधी रात के बाद संग्दिध परिस्थितियों में मकान में आग लग गई। इससे पहले फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग पर काबू पाती, तब तक युवक की जिंदा जलकर मौत हो चुकी थी। हादसे के समय युवक की पत्नी तीन बच्चों को लेकर मायके गई हुई थी। युवक की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शोर सुनकर परिवार के बाकी सदस्य मकान से बाहर आए
मवाना के मोहल्ला काबली गेट में थाने के पीछे गली में सुदेश वाल्मीकि का तिमंजला मकान है। सोमवार रात सुदेश का 30 वर्षीय बेटा आशु बीच वाली मंजिल के कमरे में सो रहा था, जबकि सबसे तीसरी मंजिल पर बने कमरे में उसका भाई अजय व सबसे नीचे उसकी मां गीता व भाई रिंकू सो रहे थे। रात लगभग ढाई बजे मकान में आग को देखकर चौकीदार शोर मचाया। शोर सुनकर परिवार के बाकी सदस्य मकान से बाहर आ गए, जबकि आशु अपने कमरे में सोता रहा।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया
इस बीच दूसरी मंजिल पर आग ने उग्र रूप ले लिया। जानकारी मिलते ही मवाना थाना प्रभारी ब्रह्म कुमार त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। उन्होंने फायर ब्रिगेड को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंची। किसी तरह फायर कर्मियों ने आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक आशु की मौत हो चुकी थी। आग में डबल बेड, छत के पंखे, कपड़े व अन्य घरेलू सामान भी जलकर राख हो गया। थाना प्रभारी बताया, आशु के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
तीन बच्चों को साथ लेकर मायके मुजफ्फरनगर गई
उन्होंने बताया, जांच के दौरान पता चला है कि पति-पत्नी के बीच विवाद था। आशु की पत्नी रेनू अपने तीन बच्चों को साथ लेकर मायके मुजफ्फरनगर गई है। पूर्व में आशु मवाना स्थित में इंडियन बैंक में चपरासी था। वर्तमान में वह कोई काम नहीं कर रहा था। उन्होंने बताया, जांच के दौरान यह बात भी प्रकाश में आई है कि पति-पत्नी में विवाद का कारण शराब था। आग के कारणों की जांच की जा रही है। आशु की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
छोटे भाई ने फांसी लगाकर की थी आत्महत्या
सुदेश वाल्मीकि के चार बेटे है। बड़ा बेटा प्रिंस, उसके बाद आशु और अजय है, जबकि चौथे नंबर के सबसे छोटे बेटे अमरदीप ने 2020 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अजय सबसे ऊपर के हिस्से में रहता है, जबकि प्रिंस निचले हिस्से में मां गीता के साथ रहता है।