उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड को अब जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के आधिकारिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने बताया कि आधार कार्ड किसी भी जन्म प्रमाणित दस्तावेज से लिंक नहीं होता, इसलिए इसे जन्म का वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता। सभी सरकारी विभागों को आदेश भेजकर निर्देश दिया गया है कि वे जन्मतिथि सत्यापन के लिए आधार का उपयोग न करें। महाराष्ट्र में भी इसी तरह का फैसला पहले लागू किया जा चुका है।
आधार कार्ड क्यों नहीं माना जाएगा जन्म प्रमाण पत्र?
नियोजन विभाग के अनुसार, आधार कार्ड केवल पहचान का दस्तावेज है। इसमें दर्ज जन्मतिथि को किसी अधिकारी या चिकित्सा संस्थान द्वारा प्रमाणित नहीं किया जाता। यही कारण है कि कई विभागों में आधार को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में उपयोग करना गलत प्रथा बन गई थी, जिसे अब रोक दिया गया है। विभाग ने सभी सरकारी कार्यालयों को इसे तुरंत लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
जन्म प्रमाण पत्र के लिए कौन-से दस्तावेज मान्य होंगे?
जिन लोगों को जन्म प्रमाण पत्र बनवाना है, उनके लिए वैध विकल्प उपलब्ध हैं।
अस्पताल द्वारा जन्म के समय दिया गया डिस्चार्ज कार्ड या जन्म सर्टिफिकेट
घर में जन्म होने पर स्थानीय प्राधिकरण द्वारा जारी प्रमाण पत्रपंचायत या नगर निगम की ओर से जारी रेकॉर्ड इन दस्तावेजों के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
महाराष्ट्र में भी लागू हुआ सख्त नियम
पिछले वर्ष महाराष्ट्र में भी इसी प्रकार का नियम लागू किया गया था। देरी से बनने वाले जन्म प्रमाण पत्रों के लिए आधार कार्ड को दस्तावेज के रूप में अमान्य घोषित किया गया था। सरकार ने पाया कि फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बड़ी मात्रा में आधार कार्ड के आधार पर बन रहे थे। इस स्थिति को रोकने के लिए आधार आधारित सभी प्रमाण पत्रों को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
सरकार का लक्ष्य—दस्तावेजों में शुद्धता और पारदर्शिता
राज्य सरकार का कहना है कि जन्म और मृत्यु से जुड़े दस्तावेज अति संवेदनशील होते हैं, इसलिए सत्यापन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या कमजोर प्रमाणित दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। नए निर्देशों से दस्तावेजों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गलत प्रमाण पत्र बनवाने की कोशिशों पर रोक लगेगी।