भारत में आधार कार्ड को नागरिक पहचान के सबसे अहम दस्तावेजों में गिना जाता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और डेटा को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं. अब एक आरटीआई (RTI) के जरिए आधार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. यह खुलासा UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के डेटा पर सवाल खड़े कर रहा है.
क्या है खुलासा?
RTI के जवाब में सामने आया कि पिछले 14 सालों में देश में करीब 11.7 करोड़ लोगों की मौत हुई लेकिन UIDAI ने सिर्फ 1.15 करोड़ आधार नंबर ही बंद किए हैं. यानी मरने वालों में से केवल 10% के भी आधार नंबर निष्क्रिय नहीं हुए हैं. इससे आधार डेटा की सच्चाई और अपडेट न होने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
UIDAI के पास नहीं है पूरी जानकारी
जब RTI में पूछा गया कि हर साल कितने आधार नंबर मौत के आधार पर बंद किए गए तो UIDAI ने कहा कि उसके पास इस बारे में कोई साल-दर-साल आंकड़ा नहीं है. सिर्फ यह जानकारी दी कि 31 दिसंबर 2024 तक कुल 1.15 करोड़ आधार नंबर बंद किए गए हैं.
देश में कितनों के पास नहीं है आधार?
RTI में जब यह सवाल भी पूछा गया कि देश में कितने लोगों के पास अभी तक आधार नहीं है तो UIDAI ने जवाब दिया कि ऐसा कोई डेटा उसके पास उपलब्ध नहीं है.
UIDAI के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मर जाता है और उसका डाटा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) से आधार डेटाबेस से मिलता है, तभी उस आधार नंबर को बंद किया जाता है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें भी होती हैं-
नाम 90% तक मेल खाना चाहिए
लिंग (Gender) पूरी तरह मेल खाना चाहिए
और ये सुनिश्चित किया जाता है कि मौत के बाद उस आधार का कोई बायोमेट्रिक इस्तेमाल या अपडेट न हुआ हो.
बिहार में आधार डेटा गड़बड़ी की ओर इशारा
बिहार के कुछ जिलों में 100% से ज्यादा आधार सैचुरेशन यानी अनुमानित जनसंख्या से भी ज्यादा लोगों को आधार कार्ड जारी हो चुके हैं.
किशनगंज: 126%
कटिहार और अररिया: 123%
पूर्णिया: 121%
शेखपुरा: 118%
इसका मतलब है कि या तो मरने वालों के आधार कार्ड बंद नहीं हुए हैं या फिर डेटा में डुप्लिकेशन और जनसंख्या अनुमान की गलतियां हैं. प्रवासन भी इसका एक कारण हो सकता है.
इस खुलासे से एक बार फिर यह साबित हुआ है कि आधार कार्ड सिस्टम में गंभीर खामियां हैं. मौत के बाद अगर आधार नंबर निष्क्रिय नहीं होते, तो इसका दुरुपयोग, फर्जीवाड़ा और जनगणना जैसे कार्यों में गड़बड़ी का खतरा बढ़ जाता है. इससे यह भी साफ हो जाता है कि UIDAI को अपने डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की जरूरत है.