
बिहार में वोटर लिस्ट विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ा निर्णय सामने आया है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि SIR पर चुनाव आयोग के रुख को बिल्कुल सही बताया है। उन्होंने कहा कि आधार को नागरिकता के निर्णायक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसे सत्यापित करने की जरूरत है। बिहार में वोटर सूची पुनरीक्षण से जुड़े केस की सुनवाई को लेकर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बिहार भारत का अंग है। अगर बिहार के पास नहीं हैं, तो दूसरे राज्यों के पास भी नहीं होंगे. ये कौन से दस्तावेज़ हैं?
Supreme Court today heard the arguments of the petitioners in the pleas challenging Election Commission's Special Intensive Revision (SIR) of Bihar's electoral rolls.
— ANI (@ANI) August 12, 2025
The arguments will continue tomorrow, 13th August. pic.twitter.com/ZkoyOQFAGY
14.71 के पास मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र है
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की ओर से इस पर कहा गया कि इसकी पुष्टि नहीं हो सकती है। जन्म प्रमाण पत्र की बात करें तो केवल 3.056% के पास ही है। पासपोर्ट 2.7%…14.71 के पास मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र है. जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार, यह साबित करने को लेकर कुछ तो होना जरूरी है। आप भारत के नागरिक हैं। हर किसी के पास प्रमाणपत्र होता है, सिम खरीदने को लेकर इसकी आवश्यकता होती है। ओबीसी/एससी/एसटी प्रमाण पत्र.
ऐसी प्रक्रिया सशर्त योजना के तहत मंजूर
इससे पहले जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट हो कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के तहत है या नहीं। उन्होंने कहा कि हमें बताएं ऐसी प्रक्रिया जारी की जा सकती है या नहीं? अगर आप यह कहते हैं कि ऐसी प्रक्रिया सशर्त योजना के तहत मंजूर है। हम प्रक्रिया पर विचार करेंगे. अगर आप कहते हैं कि यह संविधान में ही नहीं है तो फिर उस हिसाब से कार्यवाही होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि बड़े पैमाने पर बहिष्कार हुआ है. 65 लाख लोग बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बड़े पैमाने पर हटाया जाना तथ्यों और आंकड़ों पर निर्भर करता है।