आम आदमी पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने इस फैसले की जानकारी राज्यसभा सचिवालय को भी दे दी है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि अब चड्ढा पार्टी की ओर से सदन में नेतृत्वकारी भूमिका में नहीं रहेंगे।
संसद में भूमिका पर भी असर पड़ा
इस फैसले का सीधा असर राघव चड्ढा की संसद में सक्रियता पर भी पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार अब उन्हें बोलने के लिए मिलने वाला समय कम किया जा सकता है। यानी पहले की तरह खुलकर मुद्दे उठाने का मौका अब सीमित हो जाएगा। यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि चड्ढा हाल के दिनों में लगातार आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे।
जनता के मुद्दों को उठा रहे थे जोर से
पिछले कुछ समय में राघव चड्ढा ने संसद में कई ऐसे मुद्दे उठाए थे, जो सीधे आम जनता से जुड़े थे। उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगी चाय से लेकर डिलीवरी बॉयज की समस्याओं तक को जोरदार तरीके से सामने रखा। उनके इन मुद्दों को जनता के बीच भी काफी चर्चा मिली थी। ऐसे में अचानक लिया गया यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है।
अनुशासन को लेकर नाराजगी बढ़ी
सूत्रों की मानें तो पार्टी नेतृत्व राघव चड्ढा के काम करने के तरीके से खुश नहीं था। बताया जा रहा है कि वह कई बार पार्टी से बिना चर्चा किए ही मुद्दों को सदन में उठाते थे। इससे पहले उन्हें चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। माना जा रहा है कि यही वजह इस बड़े फैसले की बन सकती है।
अंदरूनी राजनीति के भी संकेत
सियासी गलियारों में लंबे समय से चर्चा थी कि राघव चड्ढा कई मामलों में पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हैं। हाल ही में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के केस में राहत मिलने के बाद भी उनकी चुप्पी ने सवाल खड़े किए थे। इससे पार्टी के भीतर असहमति की अटकलें और तेज हो गई थीं।
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आगे क्या होगा, इस पर नजरें टिकीं
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस फैसले के बाद राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका क्या होगी। फिलहाल पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन यह कदम साफ संकेत देता है कि संगठन में अनुशासन को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।