
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। मऊ से विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता बहाल कर दी गई है। विधानसभा सचिवालय ने 8 सितंबर को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की ताकत एक बार फिर बढ़ गई है और पार्टी के विधायक अब छह हो गए हैं।
कैसे गई थी सदस्यता?
अब्बास अंसारी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में मऊ सीट से सुभासपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इसी साल 31 मई को मऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें हेट स्पीच मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। इसके चलते 1 जून को उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई और मऊ सीट खाली घोषित कर दी गई थी।
हाईकोर्ट से मिली राहत
अब्बास अंसारी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 20 अगस्त को सजा पर रोक लगा दी। इसके बाद 8 सितंबर को विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधायकी बहाल करने का आदेश जारी कर दिया। इससे सुभासपा की संख्या फिर से छह हो गई है।
सुभासपा की मौजूदा ताकत
अब्बास अंसारी की वापसी के साथ यूपी विधानसभा में सुभासपा के ये छह विधायक हैं:
ओम प्रकाश राजभर (जहूराबाद)
अब्बास अंसारी (मऊ)
हंसु राम (बेल्थारा)
त्रिवेणी राम (जाखनियन)
दूधराम (महादेवा)
जगदीश नारायण (जाफराबाद)
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2022 चुनाव में सुभासपा ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में हिस्सा लिया था और छह सीटें जीती थीं। हालांकि बाद में अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर के बीच मतभेद गहराए और गठबंधन टूट गया। इसके बाद राजभर ने एनडीए का दामन थाम लिया और अब योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।
राजनीतिक मायने
अब्बास अंसारी की वापसी सुभासपा के लिए राहत और ताकत दोनों है। पांच पर सिमट चुकी पार्टी फिर से छह विधायकों के आंकड़े पर लौट आई है। राजभर अब भाजपा के सहयोगी हैं, ऐसे में उनकी पार्टी के बढ़ते विधायकों की संख्या से एनडीए की मजबूती भी और बढ़ेगी।
यूपी की सियासत को मिली नई करवट
अब्बास अंसारी की विधायकी की बहाली ने यूपी की सियासत को नई करवट दी है। यह न सिर्फ सुभासपा की ताकत में इजाफा है बल्कि ओम प्रकाश राजभर की राजनीतिक पकड़ को भी और मजबूत करता है। अब सबकी नजरें इस पर होंगी कि आगे चलकर राजभर और उनकी पार्टी राज्य की राजनीति में किस तरह अपनी भूमिका निभाती है।