Entertainment News : बॉलीवुड में जब भी किसी सफल अभिनेत्री की शादी होती है, तो उसके करियर को लेकर सवाल उठने लगते हैं. ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. मिस वर्ल्ड बनने से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन करने वाली ऐश्वर्या, शादी से पहले इंडस्ट्री की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार थीं. लेकिन अभिषेक बच्चन से शादी के बाद उनकी फिल्मों की संख्या कम होती गई, जिससे यह चर्चा तेज हो गई कि क्या शादी ने उनके करियर की रफ्तार धीमी कर दी. इसी संदर्भ में अभिषेक बच्चन का एक बयान अक्सर सामने लाया जाता है, जिसमें उन्होंने धर्मेंद्र की पत्नी का उदाहरण देते हुए इस पूरे मुद्दे को एक अलग नजरिए से समझाने की कोशिश की थी.
शादी से पहले का सुनहरा दौर
शादी से पहले ऐश्वर्या राय का करियर अपने चरम पर था। हम दिल दे चुके सनम, देवदास, ताल, जोश और गुरु जैसी फिल्मों में उनके अभिनय और खूबसूरती ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया था. वह सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हॉलीवुड और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स में भी नजर आईं. ब्रांड एंडोर्समेंट्स, अवॉर्ड्स और फेस्टिवल अपीयरेंस हर जगह उनकी मौजूदगी थी. ऐसे में दर्शकों को उम्मीद थी कि शादी के बाद भी उनका करियर उसी रफ्तार से आगे बढ़ेगा। लेकिन हकीकत इससे थोड़ी अलग रही, और यही अंतर लोगों को खटकने लगा.
शादी के बाद करियर में बदलाव की चर्चा
अभिषेक बच्चन से शादी और फिर बेटी आराध्या के जन्म के बाद ऐश्वर्या ने फिल्मों से कुछ समय का ब्रेक लिया। इस ब्रेक को ही कई लोगों ने “करियर में गिरावट” कहना शुरू कर दिया. हालांकि, यह भी सच है कि उन्होंने फिल्मों को पूरी तरह अलविदा नहीं कहा. जज़्बा, सरबजीत, ए दिल है मुश्किल और पोन्नियिन सेलवन जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। फर्क बस इतना था कि अब वह पहले की तरह लगातार फिल्में नहीं कर रही थीं. यह बदलाव उनकी प्राथमिकताओं का था या इंडस्ट्री के रवैये का इस पर बहस आज भी जारी है.
अभिषेक बच्चन का बयान और धर्मेंद्र की पत्नी का उदाहरण
इसी बहस के बीच अभिषेक बच्चन ने एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र की पत्नी हेमा मालिनी नहीं, बल्कि उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर का उदाहरण देते हुए कहा था कि हर महिला की जिंदगी में एक समय ऐसा आता है जब वह परिवार को प्राथमिकता देती है। अभिषेक का इशारा इस बात की ओर था कि करियर से पीछे हटना हमेशा मजबूरी नहीं, बल्कि एक सचेत फैसला भी हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐश्वर्या ने जो भी किया, वह अपनी मर्जी से किया और उसमें किसी तरह का दबाव नहीं था. यह बयान उन लोगों के लिए जवाब था जो मानते हैं कि शादी के बाद अभिनेत्री का करियर पति या परिवार के कारण सीमित हो जाता है.
गिरावट या नई परिभाषा?
अगर आज ऐश्वर्या राय के करियर को देखा जाए, तो उसे “गिरावट” कहना शायद सही नहीं होगा. यह कहना ज्यादा उचित होगा कि उन्होंने सफलता की एक नई परिभाषा चुनी. कम फिल्में करना, लेकिन मजबूत भूमिकाओं के साथ लौटना यह उनका तरीका रहा है. साथ ही, वह आज भी ग्लोबल आइकन हैं और उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है. शादी के बाद करियर बदलना हर महिला के लिए अलग मायने रखता है. ऐश्वर्या राय का सफर इस बात का उदाहरण है कि सफलता सिर्फ फिल्मों की संख्या से नहीं, बल्कि संतुलन और आत्मनिर्णय से भी मापी जाती है.