प्रदेश में यात्री सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई का दायरा राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के बजाय निजी संचालकों की बसों पर है। इनमें अंतरराज्यीय मार्गों पर चलने वाली डबल डेकर, स्लीपर, अनुबंधित और पर्यटक परमिट वाली बसें शामिल हैं। तीन दिन के अभियान में 904 बसों के चालान किए गए और 257 को संचालन से रोक दिया गया। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से सितंबर के बीच डबल डेकर बसों से जुड़े 36 बड़े हादसों में 26 बसें दूसरे राज्यों में पंजीकृत थीं।
मूल ढांचे में अनधिकृत बदलाव
कार्रवाई के दौरान क्षमता से अधिक सवारियां, अतिरिक्त सीटें, स्लीपर बर्थ और बस के मूल ढांचे में अनधिकृत बदलाव जैसे मामले सामने आए। इससे सवाल उठ रहा है कि जिन खामियों पर अब कार्रवाई हो रही है, वे नियमित जांच में पहले क्यों नहीं पकड़ी गईं।
सुरक्षा को खतरा देखते हुए बस सीज कराई
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह पहले भी सड़क पर डबल डेकर बस की स्थिति देखकर तत्काल कार्रवाई कर चुके हैं। जुलाई 2024 में उन्होंने प्रयागराज के सोरांव के पास एक डबल डेकर बस रुकवाकर जांच कराई थी। बस का पिछला टायर फटा था, चेचिस झुकी हुई थी और बैलून भी क्षतिग्रस्त था। यात्रियों की सुरक्षा को खतरा देखते हुए बस सीज कराई गई थी।
पर्यटक परमिट की अवधि भी समाप्त
एक अक्तूबर को किसान पथ पर दिल्ली-दरभंगा मार्ग की निजी डबल डेकर बस पकड़ी गई। 31 यात्रियों की स्वीकृत क्षमता वाली बस में 76 लोग मिले। इसमें 58 अतिरिक्त सीटें लगाई गई थीं और पर्यटक परमिट की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। यात्रियों के साथ दोपहिया वाहन, इंजन और लोहे का सामान भी ले जाया जा रहा था। बस को जब्त कर लिया गया।
32 सीट और 16 स्लीपर बर्थ
फरवरी में हरियाणा पंजीकृत डबल डेकर बस में करीब 85 यात्री मिले थे, जबकि स्वीकृत व्यवस्था 32 सीट और 16 स्लीपर बर्थ की थी। जांच में अतिरिक्त स्लीपर बर्थ और सीटें लगाकर ढांचे में बदलाव पाया गया। एक सीट आपातकालीन निकास के सामने भी थी। इस वाहन पर पहले से 67 चालान थे, जिनमें 18 लंबित थे।
चार लोगों की जान गई
मई 2025 में किसान पथ पर डबल डेकर बस में आग लगने से पांच यात्रियों की मौत हुई थी। जुलाई में लखनऊ-दिल्ली मार्ग की बस दुर्घटना में चार लोगों की जान गई और अगस्त में लखीमपुर खीरी में स्लीपर बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत तथा 38 लोग घायल हुए। सितंबर में ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड में नौ यात्रियों की मौत के बाद सुरक्षा मानकों की पड़ताल तेज हुई।
इलाहाबाद हाईकोर्ट भी स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा मानकों की जांच, बसों में किए जा रहे बदलाव और सीमा क्षेत्रों में निगरानी को लेकर परिवहन विभाग से जवाब मांग चुका है।
निजी बसों का बड़ा नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में निजी बसों की संख्या करीब 8.06 लाख बताई गई है। इनमें 14,352 स्टेज कैरिज, 10,636 अनुबंधित और 10,825 पर्यटक बसें शामिल हैं। इनमें से कई बसें दूसरे राज्यों में पंजीकृत होकर यूपी के मार्गों पर चलती हैं। पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र संबंधित राज्य के परिवहन प्राधिकरण जारी करते हैं, जबकि यूपी में उल्लंघन मिलने पर यहां की प्रवर्तन टीम कार्रवाई कर सकती है।
अब चुनौती केवल चालान करने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि निजी बसों की स्वीकृत क्षमता, परमिट, फिटनेस, ढांचा और आपात सुरक्षा व्यवस्था का नियमित सत्यापन हो। तीन दिन की कार्रवाई में सामने आई गड़बड़ियां निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं।