Action Against Insurance Company: तमिलनाडु के कृष्णागिरी में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक उपभोक्ता के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी और बैंक पर सख्त कार्रवाई की है। उपभोक्ता की कमर्शियल गाड़ी 9 दिसंबर 2020 को चोरी हो गई थी, जिसकी जानकारी उन्होंने तुरंत पुलिस, बीमा कंपनी और बैंक को दे दी थी। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावा निपटाने में लंबी देरी की और दूसरी तरफ बैंक ने बकाया किस्तों और ब्याज की वसूली जारी रखी। लंबे समय तक न्याय न मिलने से परेशान उपभोक्ता ने 13 मार्च 2025 को ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला आगे बढ़ा।
बैंक–बीमा की लापरवाही उजागर
आयोग के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेज पेश किए गए, जिसमें पाया गया कि बीमा कंपनी ने अपने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है। चोरी की घटना के बाद भी कंपनी ने बीमा क्लेम का भुगतान नहीं किया। इसके साथ ही बैंक ने भी उपभोक्ता से अनुचित रूप से ब्याज की वसूली की, जबकि वाहन चोरी होने की स्थिति में राहत देने के नियम स्पष्ट हैं। आयोग ने माना कि दोनों संस्थाओं की लापरवाही और अनियमितताओं से उपभोक्ता को मानसिक, आर्थिक और कानूनी रूप से परेशान किया गया।
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आयोग ने दिलाई पूरी रकम
28 मई 2025 को आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में आदेश दिया कि बीमा कंपनी 4.80 लाख रुपये की बीमित राशि 12% ब्याज के साथ लौटाए। वहीं बैंक को अनुचित तौर पर वसूला गया ब्याज वापस करना होगा। इसके अलावा, बीमा कंपनी और बैंक दोनों को मिलकर 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में उपभोक्ता को देने का निर्देश दिया, जिससे कुल राशि 14.80 लाख रुपये पहुंच गई। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत है जो बीमा कंपनियों और बैंकों की लापरवाही के कारण परेशान होते रहते हैं।