शेयर बाजार में आज अडानी ग्रुप के निवेशकों के लिए दिन भारी साबित हुआ। ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अडानी ग्रीन, अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी एनर्जी और अडानी पोर्ट्स जैसे शेयर 8% से लेकर 13% तक टूट गए। इस एक दिन की गिरावट से अडानी ग्रुप की 10 लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹1.1 लाख करोड़ घट गया। गिरावट के बाद ग्रुप का मार्केट कैप घटकर लगभग ₹12.45 लाख करोड़ रह गया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई
आज सबसे ज्यादा दबाव अडानी ग्रीन के शेयरों पर दिखा। इसके शेयर करीब 13% गिरकर ₹785 पर पहुंच गए। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर भी 9% से ज्यादा टूटकर ₹1886.80 पर आ गए, जो इसका 52 हफ्ते का न्यूनतम स्तर है। अडानी एनर्जी के शेयर 11% गिरकर ₹822.15 पर पहुंच गए। वहीं अडानी पोर्ट्स के शेयर करीब 8% टूटकर ₹1295.40 पर आ गए। इसके अलावा अंबुजा सीमेंट, ACC और अडानी टोटल गैस के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
गिरावट की बड़ी वजह क्या है
इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से आई एक कानूनी खबर मानी जा रही है। अमेरिका के सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने एक अमेरिकी अदालत से गौतम अडानी और सागर अडानी को सीधे ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मांगी है। रॉयटर्स ने कोर्ट फाइलों के हवाले से यह जानकारी दी है। जैसे ही यह खबर बाजार में आई, निवेशकों में चिंता बढ़ गई और शेयरों में बिकवाली तेज हो गई।
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क्यों ईमेल से समन भेजना चाहता है SEC
SEC का कहना है कि उसने पहले 2 बार आधिकारिक रास्तों से भारत में समन भेजने की कोशिश की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसी वजह से अब वह सीधे ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति चाहता है। अमेरिकी रेगुलेटर पिछले साल से इस मामले में गौतम अडानी और सागर अडानी से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। SEC के मुताबिक मौजूदा तरीकों से समन भेज पाना मुश्किल है, इसलिए नया रास्ता अपनाने की मांग की गई है।
अडानी ग्रुप का क्या कहना है
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। ग्रुप का कहना है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं और वह कानूनी तौर पर अपना बचाव करेगा। हालांकि इस नई SEC फाइलिंग पर ग्रुप की तरफ से फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भारत के कानून मंत्रालय ने भी पहले साफ किया था कि यह मामला निजी संस्थाओं और अमेरिका के बीच का कानूनी विवाद है।
क्या हैं SEC के आरोप और आगे क्या
नवंबर 2024 में सामने आए आरोपों के मुताबिक अडानी ग्रुप के कुछ अधिकारियों पर बिजली खरीद समझौतों को हासिल करने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया गया था। SEC का यह भी दावा है कि अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों को लेकर गलत जानकारी दी गई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत से क्या फैसला आता है और आगे अडानी ग्रुप की तरफ से क्या कदम उठाए जाते हैं।