Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्यदायी काल माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिकमास की शुरुआत 17 मई से होने जा रही है। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की आराधना और आत्मिक शुद्धि के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय किए गए पूजा-पाठ, दान और तप का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसलिए इस अवधि में कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।
अधिकमास का धार्मिक महत्व
अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब सूर्य और चंद्रमा के कैलेंडर में संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है, तब यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इस दौरान भक्ति, साधना और सत्संग करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
इस दौरान क्या करें
अधिकमास में नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। सुबह-शाम दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। गीता, रामायण या विष्णु पुराण का पाठ करना भी फलदायी होता है। इसके अलावा, जरूरतमंदों को दान देना, व्रत रखना और सात्विक भोजन करना इस समय विशेष महत्व रखता है। तीर्थ स्नान और धार्मिक कार्यों में भाग लेने से भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
किन कार्यों से करें परहेज
अधिकमास में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या अन्य शुभ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इसके अलावा, तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा से दूरी बनाना चाहिए। झूठ बोलना, विवाद करना और दूसरों को नुकसान पहुंचाने जैसे कार्यों से बचना आवश्यक है, क्योंकि यह समय आत्मसंयम और शुद्धता का होता है।
आध्यात्मिक उन्नति का अवसर
अधिकमास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और सुधार का भी समय है। इस दौरान व्यक्ति अपने जीवन की गलतियों को सुधारने और सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर सकता है। नियमित ध्यान और योग करने से मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति भीतर से मजबूत बनता है। इस प्रकार, अधिकमास 2026 को सही नियमों और श्रद्धा के साथ अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सुखमय और संतुलित बना सकता है।