Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग में समय-समय पर अधिक मास का आगमन होता है, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना लगभग हर 32 से 36 महीनों में एक बार आता है, लेकिन साल 2026 में बनने वाला अधिक मास बेहद खास माना जा रहा है। कारण यह है कि पंचांग की कैल्कुलेशन के अनुसार इस बार एक महीना सामान्य 30 दिनों की जगह करीब 60 दिनों तक चलेगा। यह संयोग अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और धार्मिक रूप से भी इसे शुभ फलदायक माना जाता है।
कैसे बन रहा है 60 दिनों का महीना?
हिंदू चंद्र कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है, जबकि अंग्रेज़ी कैलेंडर सूर्य की गति पर चलता है। चंद्र मास लगभग 29.5 दिन का होता है, जिससे हर वर्ष करीब 11 दिनों का अंतर पैदा हो जाता है। जब यह अंतर बढ़कर लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है, तब पंचांग में संतुलन बनाने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है।2026 में ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण यह अंतर इतना अधिक बढ़ जाएगा कि संबंधित चंद्र मास की अवधि लगभग दो महीने के बराबर हो जाएगी। इसी कारण यह महीना लगभग दोगुना लंबा—करीब 60 दिनों का बनेगा, जो अत्यंत दुर्लभ खगोलीय घटना है।
अधिक मास के दौरान बंद रहते हैं शुभ कार्य
अधिक मास को आध्यात्मिक साधना का महीना माना जाता है। इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। शास्त्रों में कहा गया है कि यह महीना स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस अवधि में भौतिक कार्यों की बजाय ईश्वर भक्ति, जप, ध्यान, पाठ, दान और उपवास का विशेष महत्व होता है। लोग इस मास में श्रीमद्भागवत पाठ, विष्णु सहस्रनाम और पुरुषोत्तम व्रत करते हैं, जिससे मन की शांति और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
क्यों माना जाता है 2026 का अधिक मास अत्यंत शुभ?
2026 का अधिक मास चंद्र-सूर्य की गति के कारण न केवल दोगुनी अवधि का बनेगा, बल्कि इसके साथ विशेष योग भी बनेंगे। ज्योतिष मत के अनुसार इतने लंबे अधिक मास में आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव और अधिक प्रबल रहता है। माना जाता है कि इस दौरान किए गए दान-पुण्य का फल सामान्य समय से अति बढ़कर प्राप्त होता है।जो लोग मानसिक तनाव, आर्थिक कठिनाइयों या जीवन में रुकावटों का सामना कर रहे हों, उनके लिए यह महीना विशेष रूप से आध्यात्मिक उन्नति का अवसर लेकर आएगा। इसलिए इसे “पुरुषोत्तम मास” कहकर श्रेष्ठ मास माना जाता है।