झारखंड की राजनीति में बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। राज्यसभा सदस्य आदित्य साहू को भारतीय जनता पार्टी की झारखंड इकाई का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने की। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल एक ही नामांकन आया था, जिसे जांच और राष्ट्रीय नेतृत्व की अनुमति के बाद मंजूरी दी गई। इसके बाद आदित्य साहू को सर्वसम्मति से झारखंड बीजेपी का अध्यक्ष घोषित कर दिया गया।
बाबूलाल मरांडी की जगह संभाली कमान
आदित्य साहू ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। बाबूलाल मरांडी फिलहाल झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले 3 अक्टूबर को पार्टी ने आदित्य साहू को झारखंड बीजेपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। अब उन्हें पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई है। पार्टी के भीतर इसे एक सोची-समझी और रणनीतिक नियुक्ति माना जा रहा है।
नेशनल काउंसिल के नाम भी हुए घोषित
प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के साथ ही जुएल ओराम ने झारखंड से नेशनल काउंसिल के सदस्यों के नामों का भी ऐलान किया। राज्य से कुल 21 नेताओं को नेशनल काउंसिल में जगह मिली है। इस सूची में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुबर दास, मधु कोड़ा और चंपई सोरेन जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा सांसद संजय सेठ, दीपक प्रकाश, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व सांसद करिया मुंडा और गीता कोड़ा को भी जिम्मेदारी दी गई है।
घोषणा के बाद पार्टी में उत्साह
आदित्य साहू के अध्यक्ष बनने के बाद झारखंड बीजेपी में उत्साह का माहौल है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देना शुरू कर दिया है। गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदित्य साहू के नेतृत्व में झारखंड बीजेपी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। उनके इस बयान के बाद पार्टी समर्थकों में नई ऊर्जा नजर आ रही है।
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सामाजिक संतुलन का भी रखा गया ध्यान
आदित्य साहू वैश्य समाज और ओबीसी वर्ग से आते हैं। उनके चयन को सामाजिक संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि इस फैसले से पार्टी को ओबीसी समुदाय में और मजबूती मिलेगी। झारखंड की राजनीति में सामाजिक समीकरणों का बड़ा महत्व रहा है, ऐसे में यह नियुक्ति संगठन को नई दिशा दे सकती है।
जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने की चुनौती
अब आदित्य साहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की है। आगामी चुनावों को देखते हुए पार्टी को गांव, प्रखंड और जिला स्तर तक सक्रिय करना उनकी प्राथमिकता होगी। बीजेपी नेताओं को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा और झारखंड में संगठनात्मक ढांचा पहले से ज्यादा मजबूत होगा। आने वाले समय में यह बदलाव सियासत में कितना असर डालेगा, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।