लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी अब राजनीतिक दलों के साथ शासन के स्तर पर भी दिखाई देने लगी है। जुलाई से चार अक्तूबर तक 103 आईएएस, 62 आईपीएस और 440 पीसीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गईं। यानी करीब तीन महीने में 605 अफसरों की प्रशासनिक जमावट की गई। इसमें जुलाई में दो दिनों के भीतर 363 पीसीएस अधिकारियों का सबसे बड़ा फेरबदल भी शामिल है।
इसके बाद अगस्त से अक्तूबर तक आईएएस और आईपीएस स्तर पर भी लगातार बदलाव हुए। अगस्त में 13 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गईं। सितंबर में 34 आईएएस अधिकारियों की तैनाती बदली गई। इसी दौरान पुलिस महकमे में 35 और फिर 18 आईपीएस अधिकारियों के आदेश हुए। अक्तूबर की शुरुआत में 15 आईएएस और 23 पीसीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गईं।
इस पूरी कवायद का असली राजनीतिक मर्म सिर्फ इतनी बड़ी संख्या में तबादले नहीं, बल्कि तैनाती के स्तर में छिपा है। जिन पदों पर बदलाव हुए हैं, उनमें जिलाधिकारी, मंडलायुक्त, पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी और उपजिलाधिकारी जैसे पद शामिल हैं। यानी शासन ने सचिवालय से लेकर जिले और तहसील तक प्रशासन की कई परतों को छुआ है।
चुनाव से करीब एक साल पहले जिलों की कमान बदलने का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यही अधिकारी सरकार की योजनाओं की जमीन पर तस्वीर बनाते हैं। लाभार्थी योजनाओं का क्रियान्वयन, जनशिकायतों का निस्तारण, राजस्व, कानून-व्यवस्था और स्थानीय विवादों से लेकर चुनाव के दौरान प्रशासनिक तैयारियों तक उनकी सीधी भूमिका होती है।
363 पीसीएस अधिकारियों का जुलाई वाला फेरबदल इस रणनीति का खास संकेत देता है। इतने बड़े पैमाने पर तहसील स्तर के अधिकारियों को बदलने का मतलब प्रशासन की निचली कड़ी को भी नए सिरे से सक्रिय करना है। इसके बाद आईएएस स्तर पर जिलों और मंडलों की कमान में बदलाव तथा आईपीएस अधिकारियों की तैनाती ने इस प्रक्रिया को ऊपर तक पूरा किया।
पुलिस की जमावट का चुनावी महत्व अलग है। सितंबर में हुए फेरबदल में कमिश्नरेट, पुलिस अधीक्षक, पीएसी, एसएसएफ, सीआईडी, आर्थिक अपराध शाखा, एटीएस और अभिसूचना जैसी इकाइयों में भी जिम्मेदारियां बदली गईं। यह संकेत देता है कि सरकार कानून-व्यवस्था के साथ संवेदनशील क्षेत्रों और चुनावी सुरक्षा तंत्र को भी समय रहते व्यवस्थित करना चाहती है।
सियासी तौर पर देखें तो 605 अधिकारियों की यह तस्वीर सरकार की ‘टीम रीसेट’ कवायद जैसी है। 2027 में सत्ता के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विपक्ष की राजनीतिक रणनीति नहीं होगी, बल्कि योजनाओं का असर, स्थानीय असंतोष, कानून-व्यवस्था और बूथ स्तर तक प्रशासनिक मशीनरी की सक्रियता भी होगी।
यही वजह है कि आने वाले महीनों में और बदलाव की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि यही रफ्तार जारी रही तो चुनावी अधिसूचना से पहले तक जिलों की कमान संभालने वाली टीम काफी हद तक तय हो चुकी होगी। फिलहाल 605 तबादले इतना जरूर बताते हैं कि योगी सरकार ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले प्रशासनिक मोर्चे की बिसात बिछानी शुरू कर दी है।