Advay Jain Youngest Author : अद्वय जैन ने महज 3 साल की उम्र में ऐसा काम कर दिखाया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। भारतीय मूल के अद्वय ने इतनी कम उम्र में अपनी किताब प्रकाशित करवाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाई है। उनकी इस कामयाबी की चर्चा अब काफी हो रही है। जहां इस उम्र में बच्चे खेलना और नई चीजें सीखना शुरू करते हैं, वहीं अद्वय ने अपनी सोच और रचनात्मकता से एक खास पहचान बना ली। उनकी कहानी बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी प्रेरणा देने वाली है।
खाने की बर्बादी पर है किताब
अद्वय की किताब का नाम डिनो लर्न्स नॉट टू वेस्ट फूड है। इस किताब के जरिए बच्चों को खाना बर्बाद न करने और खाने की अहमियत समझने का संदेश दिया गया है। किताब में डिनो नाम के किरदार के जरिए बच्चों को आसान तरीके से अच्छी आदतें सिखाने की कोशिश की गई है। इसकी खास बात यह है कि इतनी छोटी उम्र में अद्वय ने एक ऐसी सीख को अपनी कहानी का हिस्सा बनाया, जो हर घर और हर बच्चे के लिए जरूरी है।
स्कूल के अनुभव से आया कहानी का विचार
अद्वय की इस किताब के पीछे उनके स्कूल का एक अनुभव जुड़ा है। नए प्री-स्कूल में जाने के बाद खाने से जुड़ी कुछ बातों ने उनके मन में कहानी का विचार पैदा किया। उनके माता-पिता ने उनकी कल्पना और नए विचारों को आगे बढ़ाने में मदद की। बताया गया है कि अद्वय पहले चित्रों के जरिए अपने विचार जाहिर करते थे। धीरे-धीरे इन्हीं चित्रों और छोटी-छोटी कहानियों को किताब का रूप देने की कोशिश की गई। इस तरह एक सामान्य अनुभव से बच्चों के लिए एक खास कहानी तैयार हुई।
परिवार ने सपने को पूरा करने में की मदद
किसी भी छोटे बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में परिवार की भूमिका काफी अहम होती है। अद्वय के मामले में भी उनके माता-पिता ने उनकी रुचि को समझा और उसे आगे बढ़ाने में साथ दिया। किताब को तैयार करने की प्रक्रिया में कई महीने लगे। उनकी बड़ी बहन अव्या भी लेखन और चित्रकारी में रुचि रखती हैं। ऐसे माहौल में अद्वय को भी अपनी कल्पना को शब्दों और चित्रों के जरिए सामने लाने का मौका मिला। परिवार के सहयोग ने उनकी इस खास उपलब्धि तक पहुंचने में मदद की।
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छोटी उम्र में दिया बड़ा संदेश
अद्वय जैन की कामयाबी सिर्फ एक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। उनकी किताब बच्चों को यह समझाने की कोशिश करती है कि खाने की कद्र करना और उसे बेकार न जाने देना कितना जरूरी है। उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि बच्चों की छोटी-छोटी बातों और विचारों को सही दिशा दी जाए, तो वे कुछ अलग कर सकते हैं। अद्वय अब चार साल के हो चुके हैं और उनकी अगली किताब पर भी काम करने की खबर है। इतनी कम उम्र में मिली इस पहचान ने उन्हें चर्चा में ला दिया है।