अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के साथ लड़ाई खत्म करने की इच्छा जताई है। अफगानिस्तान के नेताओं का कहना है कि वे पाकिस्तान के साथ बातचीत करना चाहते हैं और दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना चाहते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ गया है, जिसमें अक्टूबर में हुई लड़ाई में 70 से ज्यादा लोग मारे गए थे।
अफगानिस्तान के नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार ने दावा किया है कि अफगानिस्तान पर हमले अमेरिका के कहने पर किए गए हैं। उन्होंने इसके पीछे बगराम एयरबेस की कहानी बताई है।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव के मुख्य कारण हैं:
- डूरंड लाइन विवाद: 1893 में ब्रिटिश राज में बनाई गई डूरंड लाइन को पाकिस्तान एक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान इसे मान्यता नहीं देता है।
- तहरीक-ए-तालीबान पाकिस्तान (TTP): पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP को पनाह दे रहा है, जो पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों को अंजाम देता है।
- सुरक्षा चिंताएं: पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान उसकी सुरक्षा के लिए खतरा है, जबकि अफगानिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान उसकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।
शांति प्रक्रिया में बाधाएं:
- परस्पर अविश्वास: दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास है, जो शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोकता है।
- TTP का मुद्दा: TTP का मुद्दा एक बड़ी बाधा है, क्योंकि पाकिस्तान इसे एक आतंकवादी संगठन मानता है, जबकि अफगानिस्तान इसे एक राजनीतिक संगठन के रूप में देखता है।
- डूरंड लाइन का समाधान: डूरंड लाइन के मुद्दे पर सहमति नहीं होने से शांति प्रक्रिया में बाधा आ रही है।
शांति प्रक्रिया में कतर और तुर्की मध्यस्थता कर रहे
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया में कतर और तुर्की मध्यस्थता कर रहे हैं। दोनों देशों ने दोहा और इस्तांबुल में शांति वार्ता की है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और स्थायी शांति के लिए तंत्र बनाने पर सहमति बनी है.