
भारत की तरह अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। अफगानिस्तान की कुनार नदी पर बांध बनाकर पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकने की प्लानिंग की गई है। तालिबान सरकार के आर्मी जनरल मुबीन ने गुरूवार को कुनार नदी पर बन रहे बांध का मुआयना किया। उन्होंने कहा कि सरकार से फंड जमा करने की अनुमति ली जाएगी ताकि बांध को जल्द तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पानी अफगानिस्तान के लिए जीवनदायिनी की तरह है और इसे बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
तालिबान के उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने घोषणा की है कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा से कुनार नदी पर बिना किसी विलंब के बांधों के निर्माण के निर्देश मिले हैं. यह नदी पाकिस्तान में बहा करती है। यह पाकिस्तान के लिए बड़ा सोर्स है. बांध के लिए विदेशी कंपनी की बजाय घरेलू कंपनियों से बातचीत जारी है
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फैसले से क्या होगा पाकिस्तान पर असर
अफगानिस्तान के इस निर्णय से पाकिस्तान को कुनार नदी से मिलने वाला पानी कम हो जाएगा। इससे पाक के लोगों को पीने और सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। पाकिस्तान में पानी की कमी की वजह से कृषि उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे आर्थिक नुकसान होने की संभावना है। अफगानिस्तान के बांध से पाकिस्तान को मिलने वाली बिजली पर असर होगा।
अफगानिस्तान को ऐसे मिलेगा लाभ
अफगानिस्तान के बांध बनाने के पीछे का लक्ष्य ऊर्जा उत्पादन है। अफगानिस्तान का उद्देश्य कुनार नदी पर बांध बनाकर बिजली उत्पादन करना है। इससे देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो सकेगी। इसके साथ बांध से मिलने वाले पानी का उपयोग सिंचाई के लिए हो सकेगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ सकता है। अफगानिस्तान की योजना से देश का आर्थिक विकास भी होगा, इसके साथ लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा। बीते दिनों पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि तोड़ दी। जल आपूर्ति पर रोक लगाने पर जोर दिया गया था। कश्मीर में 26 नागरिकों की मौत के तुरंत बाद, सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी को रद्द कर दिया।