23 जून 1985 को एयर इंडिया फ्लाइट 182 'कनिष्क' बम कांड पर 41 साल बाद कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना कि इसके पीछे खालिस्तानी चरमपंथी थे। कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में साफ कहा:"पिछले साल एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुए बम हमले की 40वीं बरसी थी। इस हमले के संदिग्ध कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE) समूहों के सदस्य थे"। CSIS ने इसे "कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला" बताया, जिसमें 329 लोगों की जान गई, जिनमें से ज़्यादातर कनाडाई नागरिक थे।
23 जून 1985 को क्या हुआ था?
फ्लाइट 182 मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए दिल्ली जा रही एयर इंडिया की बोइंग 747 'कनिष्क' बम ब्लास्ट आयरलैंड के तट के पास 31,000 फीट की ऊंचाई पर कार्गो होल्ड में धमाका हुआ था। विमान हवा में ही टूटकर अटलांटिक में गिर गया। इस हादसे में 268 कनाडाई, 27 ब्रिटिश, 24 भारतीय नागरिक मारे गए। इसमें 80 से अधिक बच्चे शामिल थे।
खालिस्तानी कनेक्शन
जांच में सामने आया कि बब्बर खालसा इंटरनेशनल के आतंकियों ने बम रखा था। इसमें मास्टरमाइंड तलविंदर सिंह परमार को माना गया। कनाडाई पुलिस को संदेह था कि परमार हमले के पीछे का मास्टरमाइंड था। इस मामले में इंद्रजीत सिंह रेयात को दोषी ठहराया गया। यही एकमात्र सजा हुई थी। इसका मकसद ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेना है।
आतंकवाद को लेकर सवाल उठाता रहा
भारत लगातार कनाडा पर खालिस्तानी आतंकवाद को लेकर सवाल उठाता रहा। 23 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आयरलैंड में कहा- "यह दुर्घटना नहीं थी, बल्कि भारत को विभाजित करने के इच्छुक अतिवादी तत्वों की ओर जानबूझकर किया गया जघन्य कृत्य था"।
जांच में 20 साल लगे
कनाडा ने पहली बार आधिकारिक रिपोर्ट में "खालिस्तानी चरमपंथी (CBKE)" को जिम्मेदार ठहराया। कनाडाई PM मार्क कार्नी ने 40वीं बरसी पर कहा-"268 कनाडाई नागरिक मारे गए थे। यह हमारे देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक हमला है"। कनाडा की लापरवाही भी कबूली 2006 की जॉन मेजर आयोग रिपोर्ट में माना गया कि "कनाडा सरकार, RCMP और CSIS की त्रुटियों की क्रमिक श्रृंखला" से हमला हुआ। जांच में 20 साल लगे, 130 मिलियन डॉलर हुए।