इंदौर का ऐतिहासिक राजबाड़ा एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। करीब 80 वर्षों के बाद यहां फिर से दरबार सजेगा, लेकिन इस बार यह राजशाही नहीं बल्कि लोकतंत्र का दरबार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश की कैबिनेट बैठक 21 मई को इसी ऐतिहासिक स्थल पर होने जा रही है। यह आयोजन लोकमाता अहिल्या बाई होलकर की 300वीं जयंती वर्ष के समापन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्रीगण इंदौर की गौरवशाली विरासतों से रूबरू होंगे। राजबाड़ा को एक अस्थायी सचिवालय के रूप में सजाया जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन होगा। पूरे आयोजन में इंदौर की सांस्कृतिक विरासत, मालवी परंपरा और विकास यात्रा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
राजबाड़ा में फिर सजेगा लोकतंत्र दरबार
21 मई को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक ऐतिहासिक राजबाड़ा परिसर में होगी। यह वही स्थान है जहां करीब 80 साल पहले आखिरी बार होलकर वंश का राजदरबार सजा था। अब यह स्थान लोकतांत्रिक शासन की ऐतिहासिक बैठक का साक्षी बनेगा।
नाट्य, प्रदर्शनी और चौपाटी से मिलेगा सांस्कृतिक रंग
बैठक के पूर्व 20 मई को शाम 6 बजे राजबाड़ा पर विकास कार्यों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन होगा। शाम 7 बजे लता मंगेशकर हॉल में अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन होगा। रात को सराफा चौपाटी में मालवी व्यंजनों की प्रस्तुति भी की जाएगी।
सीएम और कैबिनेट लालबाग व चिड़ियाघर भी देखेंगे
मीटिंग से पहले 21 मई की सुबह मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट सदस्य इंदौर के चिड़ियाघर और लालबाग पैलेस का भ्रमण करेंगे। इसके बाद राजबाड़ा पहुंचकर बैठक में भाग लेंगे। बैठक में प्रदेश हित के कई अहम फैसले लिए जाएंगे।
मालवी परंपरा में होगा स्वागत, कैबिनेट भोज भी खास
कैबिनेट सदस्यों का स्वागत पारंपरिक मालवी अंदाज में किया जाएगा। पगड़ी पहनाकर तिलक किया जाएगा। भोजन में दाल-बाटी, लड्डू, चूरमा, केसर श्रीखंड जैसे व्यंजन परोसे जाएंगे जो इस आयोजन को सांस्कृतिक रूप से और खास बनाएंगे।
प्रशासनिक तैयारियां पूरी, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राजबाड़ा को अस्थायी सचिवालय में तब्दील किया जा रहा है। 150 से अधिक लाइजनिंग अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे। ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष पुलिस बल तैनात रहेगा। कलेक्टर और नगर निगम के अधिकारी पूरी मुस्तैदी से व्यवस्था में लगे हुए हैं।