लखनऊ। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार सायंकाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर औपचारिक चर्चा और समय मांगा जा सकता है। पार्टी नेतृत्व इसे मई के दूसरे सप्ताह में पूरा करने की तैयारी में है।
वरिष्ठ मंत्रियों के हटने और विभाग बदलने के आसार
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अंतिम और रणनीतिक माना जा रहा है। वर्तमान में योगी मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 सदस्यों की क्षमता है। ऐसे में 5-6 नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है। चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं, कुछ को हटाया भी जा सकता है और नए युवा, महिला, ब्राह्मण, दलित तथा पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधियों को मौका दिया जाएगा।
पश्चिमी यूपी की बढेगी भागीदारी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद प्रदेश भाजपा संगठन में भी बड़े बदलाव होने वाले हैं। जिला, मंडल और मोर्चा स्तर के पदों को भरा जाएगा। साथ ही सहयोगी दलों के नेताओं को विभिन्न निगमों, मंडलों और आयोगों में खाली पड़े अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों पर नियुक्त किया जाएगा। इससे गठबंधन को मजबूती मिलेगी और आगामी चुनावी रणनीति को नई दिशा मिलेगी।
विस्तार से जातीय क्षेत्रीय समीकरण साधेगी भाजपा
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े समेत शीर्ष नेताओं की हालिया लखनऊ बैठक और मुख्यमंत्री योगी के दिल्ली दौरों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है। भाजपा अब बंगाल की जीत के जोश को यूपी में भी उतारना चाहती है। राजनीतिक विश्लेषक इसे योगी सरकार की छवि को और निखारने तथा जातीय-क्षेत्रीय समीकरण साधने का बड़ा कदम मान रहे हैं।
सियासी गलियारों में विस्तार की अटकलें छाई
लखनऊ की सियासी गलियारों में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें ही छाई हुई हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो मई के मध्य तक यूपी की राजनीतिक तस्वीर साफ हो जाएगी। यह विस्तार न केवल योगी कैबिनेट को नई ऊर्जा देगा, बल्कि 2027 के महासंग्राम के लिए भाजपा को मजबूत स्थिति में लाएगा।