NEET से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं की आवाज उठाने के बाद अब सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर नया अभियान शुरू किया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से उन्होंने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की। इस मुहिम के जरिए सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और छात्रों की समस्याओं को सामने लाने की तैयारी है।
सरकारी स्कूल की स्थिति पर उठाए सवाल
अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद एक जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है तो देश के विकास की बात कैसे की जा सकती है। उन्होंने स्कूल की खिड़कियां खराब होने और छात्रों के लिए पर्याप्त बेंच नहीं होने का भी दावा किया।
स्कूलों का डेटा जुटाने के लिए चेकलिस्ट
दीपके के मुताबिक, अभियान के तहत एक चेकलिस्ट फॉर्म तैयार किया गया है। इसके जरिए महाराष्ट्र समेत देशभर के स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। बाद में इस डेटा को एकत्र कर स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य स्कूलों की समस्याओं को संबंधित प्रशासन और सरकार के सामने रखना है।
सरकारी स्कूल बंद होने का लगाया आरोप
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और इससे गरीब परिवारों के बच्चों पर असर पड़ा है। उन्होंने सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, सरकार को नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए स्कूल बंद होने के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं हुई है।
छात्रों की समस्याओं को अभियान से जोड़ने की तैयारी
दीपके ने कहा कि कई छात्र सोशल मीडिया के जरिए अपने स्कूलों की समस्याएं सामने ला रहे हैं। कहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क की समस्या है तो कहीं बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए ऐसे मुद्दों को एक मंच पर लाने की कोशिश होगी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल की टूटी खिड़कियों को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बैनरों से ढका गया था और स्कूल में छात्रों की संख्या के मुकाबले बेंच कम थीं।
निजी स्कूलों की फीस पर सीमा की मांग
अभिजीत दीपके ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर भी सरकार से बड़ा कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़ी रकम खर्च करने को मजबूर हैं। उनके मुताबिक, निजी स्कूलों की फीस पर एक सीमा तय की जानी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।
सरकारी अस्पतालों को लेकर भी आंदोलन का ऐलान
स्कूलों के बाद दीपके ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी आंदोलन शुरू करने की बात कही। उन्होंने सार्वजनिक अस्पतालों में सुविधाओं की कमी और मरीजों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने संकेत दिया कि सीजेपी आने वाले समय में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर भी अभियान चला सकती है।