Digital Gold: सोने की कीमतों में तेजी के बीच डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सरकार डिजिटल गोल्ड के लिए नए नियम बनाने पर विचार कर रही है। इसके तहत रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सेबी की निगरानी में इस पूरे क्षेत्र को लाने की संभावना है। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है।
हर यूनिट के पीछे असली सोना जरूरी
प्रस्तावित व्यवस्था में डिजिटल गोल्ड की हर यूनिट के पीछे उतनी ही मात्रा में असली सोना रखने की शर्त शामिल हो सकती है। यानी अगर किसी ग्राहक को डिजिटल रूप में जितना सोना बेचा गया है, उसके बराबर सोना सुरक्षित जगह पर मौजूद होना जरूरी होगा। इससे डिजिटल गोल्ड बेचने वाली कंपनियों के लिए अपने पास रखे सोने का सही हिसाब रखना जरूरी हो सकता है।
सोने की जांच और रिपोर्ट पर जोर
नए नियम लागू होने पर कंपनियों को अपने पास रखे सोने की नियमित जांच और रिपोर्टिंग करनी पड़ सकती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों के नाम पर जितना डिजिटल गोल्ड दिखाया जा रहा है, उसके पीछे वास्तव में उतना ही सोना मौजूद है। साथ ही सोने की सुरक्षा, उसके रखरखाव और ग्राहक के अधिकारों को लेकर भी नियम ज्यादा साफ हो सकते हैं।
सेबी ने पहले भी दी थी चेतावनी
सेबी पहले ही डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को सावधान कर चुका है। नवंबर 2025 में सेबी ने कहा था कि डिजिटल गोल्ड उसके नियामक दायरे में आने वाले गोल्ड ईटीएफ या दूसरे नियंत्रित सोने के उत्पादों से अलग है। ऐसे डिजिटल गोल्ड उत्पाद उस समय सेबी के दायरे से बाहर थे और उनमें शेयर बाजार वाले निवेशक सुरक्षा नियम लागू नहीं होते थे।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है
अगर प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों को इसके पीछे रखे असली सोने, उसकी सुरक्षा और मालिकाना हक को लेकर ज्यादा स्पष्ट जानकारी मिल सकती है। कंपनियों के लिए भी सोने की मात्रा और उसकी देखरेख को लेकर जवाबदेही बढ़ सकती है। साथ ही किसी कंपनी या उसके सहयोगी के सामने आर्थिक परेशानी आने पर ग्राहक के सोने के साथ क्या होगा, इसे लेकर भी साफ नियम बनाए जा सकते हैं। हालांकि, आरबीआई और सेबी की जिम्मेदारियां किस तरह तय होंगी और अंतिम नियम क्या होंगे, यह अभी साफ नहीं है।