आंध्र प्रदेश के अलुरी सीताराम इलाके में सुरक्षा बलों और माओवादी संगठन के बीच एक बार फिर बड़े पैमाने पर मुठभेड़ हुई। ताज़ा कार्रवाई में पुलिस ने सात नक्सलियों को ढेर कर दिया। यह ऑपरेशन तब शुरू हुआ जब पुलिस टीम नक्सल संगठन के शीर्ष चेहरे देवजी की तलाश में घने जंगलों में दाखिल हुई। देवजी को संगठन का महासचिव माना जाता है और हिडमा के बाद माओवादियों में बचा हुआ प्रमुख नेतृत्वकर्ता कहा जाता है। पुलिस के करीब आते ही उसकी टीम ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी तेज हो गई। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने सात नक्सलियों को मार गिराया। मौके से कई हथियार और भारी मात्रा में गोलाबारूद बरामद हुआ। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह ऑपरेशन नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एक और माओवादी कमांडर ढेर
इस घटना से एक दिन पहले, सोमवार को, आंध्र प्रदेश की एंटी-नक्सल स्पेशल फोर्स ग्रेहाउंड्स और स्थानीय पुलिस ने एक संयुक्त अभियान चलाया था। यह मुठभेड़ उस इलाके में हुई जहां आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमाएं मिलती हैं। इस कार्रवाई में कुख्यात माओवादी कमांडर मारा गया, जिसे सुरक्षा एजेंसियां अब तक की सबसे बड़ी नक्सल-विरोधी उपलब्धियों में से एक मान रही हैं। राज्य के डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता ने इस ऑपरेशन को “नक्सल विरोधी अभियान की ऐतिहासिक सफलता” बताया।
ऑपरेशन कैसे आगे बढ़ा?
डीजीपी के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को तीन राज्यों की सीमावर्ती जंगल पट्टी में माओवादी गतिविधियों की विश्वसनीय जानकारी मिली थी। इस इनपुट के आधार पर सोमवार देर रात ग्रेहाउंड्स और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें मारेडुमिल्ली के घने जंगलों में तलाशी अभियान पर निकलीं। जब सुरक्षाबल आगे बढ़ रहे थे, तभी माओवादियों ने अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। लंबे समय तक चली इस भिड़ंत में सुरक्षा बलों ने छह माओवादियों को मार गिराया, जिनमें माओवादी संगठन का कुख्यात चेहरा हिडमा भी शामिल था। हिडमा को लंबे समय से संगठन का सबसे हिंसक और रणनीतिक रूप से खतरनाक नेता माना जाता था। उसकी मौत को सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सली ढांचे पर बड़ा हमला बताया है।