पाकिस्तान से दोस्त तुर्की को इतनी भारी पड़ी जिसका अंदाजा उसे भी नहीं था, पहले भारत से हजारों करोड़ का झटका लगा, फिर उसने अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार ली है, दरअसल इस्तांबुल की बैठक में तुर्की ने तालिबान को इस्लाम से जुड़े मुद्दे पर खरी-खोटी सुना दी, जिसके बाद कहा जा रहा है कि तुर्की की इस हरकत से तालिबान नाराज हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान पाकिस्तान को ही होगा.
तालिबान के रिएक्शन का इंतजार !
खबरों की मानें तो इस्तांबुल में एक बैठक के दौरान तुर्की ने कहा कि अफगानिस्तान में आतंकवादी पल रहे हैं जो ठीक नहीं है. दिलचस्प बात ये है कि तुर्की ने यही आरोप पाकिस्तान पर नहीं लगाया. तुर्की ने तालिबान शासन से तुरंत इसे खत्म करने की अपील की. तुर्की ने ये भी कहा कि अफगानिस्तान को हिंसा छोड़ एक ऐसी सरकार का गठन करना चाहिए जो लोकतांत्रिक हो. तुर्की ने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार पर भी तालिबान की निंदा की. तालिबान के खिलाफ ऐसे वक्त में सख्त टिप्पणी की है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अंकारा के दौरे पर हैं. अब इस पूरे मामले में तालिबान के रिएक्शन का इंतजार हो रहा है.
तालिबान के शासन में सब कुछ ठीक !
बता दें तालिबान के अकुंदजदा वर्तमान में अफगानिस्तान के सुप्रीम लीडर हैं अखुंदजदा ने हाल ही में एक बयान के जरिए कहा था कि तालिबान के शासन में सब कुछ ठीक चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान इस्लामी शासन लाने केलिए कृत संकल्पित है और उसी दिशा में मुल्क अग्रसर है. तालिबान को 2021 में अफगानिस्तान में सत्ता की कुर्सी मिली थी. दुनिया भर में तालिबान की चर्चा कट्टर शासन की वजह से हो रही है. यही वजह है कि चार साल बीत जाने के बाद भी अब तक किसी भी देश ने तालिबान को मान्यता नहीं दी है. हालांकि पाकिस्तान तालिबान से दोस्ती बढ़ाने के लिए ठोस प्रयासों में जुटा हुआ है. इसके लिए पाकिस्तान चीन को साध रहा है. अब जिस तरीके से तुर्की ने तालिबान की आलोचना की है, उससे पाकिस्तान की आगे की राह और भी मुश्किल हो गई है.