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India-US Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त 2025 को भारत से होने वाले आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ अब 50% हो गया है। जिसकी वजह से दोनों देशों के रिश्ते खराब हो गए हैं। ऐसे में इसका खामियाजा भारतीय वर्कर्स को भी भुगतना पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सबसे बड़ी मुसीबत अमेरिकी वर्क वीजा को लेकर हो सकती है। इमिग्रेशन पॉलिसी को कड़ा किया जा रहा है, वीजा नियम मुश्किल बनाए जा रहे हैं और अमेरिकी लोगों को जॉब देने में प्राथमिकता देने की बात हो रही है।
भारतीयों को कई तरह के वीजा दिए जाते
आपको बता दें कि अमेरिका में काम करने के लिए भारतीयों को कई तरह के वीजा दिए जाते हैं, जिसमें H-1B सबसे ज्यादा पॉपुलर वीजा है। H-1B वीजा पाने में भारतीय सबसे आगे रहे हैं। इस वीजा की वजह से भारतीय अमेरिका में टेक वर्कर्स, डॉक्टर्स और कई तरह के स्किल प्रोफेशनल्स जॉब कर पाते हैं। अगर H-1B वीजा में कोई बदलाव होता है, तो उससे भारत की अरबों डॉलर की आईटी इंडस्ट्री काफी ज्यादा प्रभावित होगी। H-1B वीजा प्रोग्राम में होने वाले बदलावों का सीधा असर भारतीय आईटी सेक्टर पर पड़ेगा, जो अपने कस्टमर के साथ काम करने के लिए अमेरिका में प्रोफेशनल्स भेजने की अपनी क्षमता पर काफी हद तक निर्भर है।
भारतीय स्टूडेंट्स-वर्कर्स के सामने क्या परेशानी है?
अमेरिका H-1B वीजा देने के लिए इस्तेमाल होने वाले लॉटरी सिस्टम को बदलना चाहता है। उसकी जगह अमेरिका सैलरी आधारित सेलेक्शन प्रोसेस लाने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है तो सिर्फ ज्यादा सैलरी वाले लोगों को ही यूएस में जॉब मिलेगी। ट्रंप के पूर्व सलाहकार स्टीव बैनन ने H-1B प्रोग्राम को खत्म करने की मांग की है और विदेशी छात्रों के लिए 'एग्जिट वीजा' का सुझाव दिया है।
आवेदकों को सोशल मीडिया अकाउंट किया जा रहा चेक
स्टूडेंट वीजा देने से पहले आवेदकों का सोशल मीडिया अकाउंट चेक किया जा रहा है। अगर कुछ भी आपत्तिजनक पाया जाता है, तो उसके आधार पर वीजा कैंसिल किया जा सकता है। यही वजह है कि अमेरिका पढ़ने जाने की सोच रहे भारतीयों के बीच चिंता फैल गई है।