मध्यप्रदेश के वन क्षेत्र खिवनी अभयारण्य में हुई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद आदिवासियों में गहरा असंतोष पनप गया है। हजारों की संख्या में आदिवासियों ने विरोध प्रदर्शन कर सरकार को घेर लिया। ऐसे में लंबे समय से सियासी हाशिए पर चल रहे मंत्री विजय शाह को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौके पर भेजने का फैसला लिया है। उन्हें आदिवासियों को समझाने-बुझाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कर्नल सोफिया विवाद के बाद सियासी हाशिए पर थे विजय शाह
11 मई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद विजय शाह विवादों में आ गए थे। यह मामला हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद से वे केबिनेट की कई बैठकें छोड़ते रहे और राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे। हाल ही में पार्टी के एक शिविर में जरूर पहुंचे, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखी।
खिवनी अभयारण्य में वन विभाग की कार्रवाई से उपजा आदिवासी असंतोष
23 जून को देवास और सीहोर जिलों में फैले खिवनी अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस सख्त कार्रवाई से नाराज होकर आसपास के जिलों—हरदा, बैतूल, खंडवा, खरगोन के हजारों आदिवासी खातेगांव में एकजुट हो गए और विरोध प्रदर्शन किया। विरोध इतना बड़ा था कि सरकार पर दबाव बढ़ गया।
विपक्ष ने घेरा, सरकार ने संभाली रणनीति
विरोध प्रदर्शन में कई पूर्व नेताओं और जनजातीय संगठनों ने भी भाग लिया और सरकार की आलोचना की। कांग्रेस और जयस नेताओं ने इसे आदिवासी अधिकारों पर हमला बताया। इस स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने आदिवासी समुदाय से आने वाले जनजातीय मंत्री विजय शाह को आगे किया है।
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी जिम्मेदारी की जानकारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने विजय शाह को खिवनी अभयारण्य भेजने का निर्देश दिया है। उन्होंने प्रशासन को यह भी निर्देशित किया है कि कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित न हों और संवेदनशीलता बनी रहे।