NEET UG 2026: नीट पेपर लीक के बाद देश की सबसे बड़ी एग्जाम एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी (NTA) सवालों के घेरे में है। अब एनटीए के प्रशासनिक ढांचे और वजूद को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जिस एग्जाम एजेंसी के सहारे देश के करोड़ों बच्चों का भविष्य है उसकी खुद की बुनियादी नींव कितनी कमजोर है।
महज 50 रुपए में बनी देश की सबसे बड़ी एग्जाम एजेंसी
सरकारी दस्तावेजों में कई हैरान करने वाली बातें सामने आई हैं। एनटीए का गठन किसी मजबूत संवैधानिक या स्वायत्त संस्था की तरह नहीं किया गया है। जानकारी में सामने आया है कि एनटीए काम तो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के लिए करती है, लेकिन इसका गठन सहकारिता कानून के तहत एक 'सोसायटी मॉडल' पर किया गया है। ऑफिशियल दस्तावेजों के अनुसार, एनटीए का पंजीकरण 'सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत 2018 में दिल्ली में हुआ था, जिसके लिए महज 50 रुपए की मामूली फीस दी गई थी। आलोचना करने वाले और विशेषज्ञ ये सवाल पूछ रहे हैं कि क्या देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस को संभालने वाली संस्था का कानूनी आधार इतना हल्का होना चाहिए?
UPSC और SSC जितना मजबूत क्यों नहीं बन पा रहा NTA?
एक ओर जहां यूपीएससी और एसएससी जैसी संस्थाओं का गठन एक बेहद मजबूत वैधानिक, संस्थागत और संवैधानिक ढांचे के तहत हुआ है, वहीं एनटीए को लेकर आरोप है कि इतनी बड़ी नेशनल एग्जाम एजेंसी आज भी सिर्फ एक 'एडहॉक सिस्टम' पर चल रही है।
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NTA ने चार अधिकारियों को हटाया
नीट पेपर के लीक होने के बाद NTA ने आनन-फानन में चार वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर वापस भेज दिया है। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि इन अधिकारियों को अचानक हटाना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि एनटीए में सब कुछ ठीक नहीं है। इससे एनटीए की कार्यप्रणाली पर और भी संदेह के घेरे में है।
21 जून को होगा री एग्जाम
नीट पेपर लीक के बाद अब एनटीए ने री एग्जाम की घोषणा की है। अब ये एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि क्या इस व्यवस्था में सुधार होगा या आगे भी ऐसे ही बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ होता रहेगा।