Agniveer Bharti 2025: भारतीय सेना में अग्निवीर बनने की प्रक्रिया अब और कड़ी हो गई है। वर्ष 2025 से होने वाली अग्निवीर भर्ती में सिर्फ शारीरिक फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और तनाव झेलने की क्षमता को भी जांचा जाएगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर एक विशेष मनोवैज्ञानिक परीक्षण को अनिवार्य किया गया है। यह बदलाव सेना में अनुशासन, आत्मसंयम और मानसिक संतुलन की महत्ता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि भविष्य में तनावजनित घटनाओं को रोका जा सके।
अब मानसिक परीक्षण भी अनिवार्य
अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में पहली बार मानसिक मजबूती का परीक्षण जोड़ा गया है। इस टेस्ट का उद्देश्य यह जांचना है कि अभ्यर्थी तनावपूर्ण स्थितियों में कितना संतुलित रह सकता है। यह मनोवैज्ञानिक परीक्षण रक्षा मनोवैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान (DIPR) द्वारा तैयार किया गया है और अब इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है।
कैसे
होगा यह टेस्ट?
टेस्ट पूरी तरह ऑनलाइन होगा और 15 मिनट की अवधि का होगा। जैसे ही उम्मीदवार 1600 मीटर की दौड़ पास करेंगे, उन्हें मोबाइल पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से वे यह टेस्ट देंगे। इस टेस्ट में फेल होने वाले अभ्यर्थी आगे की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। यह प्रक्रिया अगस्त 2025 से ग्वालियर, चंबल और बुंदेलखंड में शुरू हो रही है।
अफसरों से लेकर अग्निवीर तक अब समान कसौटी
अब तक ऐसा मनोवैज्ञानिक टेस्ट केवल NDA, CDS और JCO जैसी अफसर रैंक के अभ्यर्थियों के लिए होता था। लेकिन अब यह परीक्षण जवान रैंक के अग्निवीरों के लिए भी लागू कर दिया गया है, हालांकि उनके लिए टेस्ट का प्रारूप अलग होगा। इस बदलाव से सेना में भर्ती की गुणवत्ता और भी बेहतर होगी।
सेना
में मानसिक संतुलन क्यों जरूरी?
ग्वालियर भर्ती कार्यालय के निदेशक कर्नल पंकज कुमार के अनुसार, सेना में सेवा करते समय जवानों को कई बार मानसिक रूप से बेहद तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि सैनिक मानसिक रूप से भी उतना ही मजबूत हो, जितना शारीरिक रूप से। नया टेस्ट इस योग्यता की पहचान करने में मदद करेगा।