दिल्ली, नोएडा, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी यूपी तथा बिहार की ओर यात्रा करने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से चर्चा में चल रही एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना अब अमल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए करीब 51 किलोमीटर लंबा नया लिंक एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 4,775 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है, जिससे उत्तर प्रदेश की एक्सप्रेसवे नेटवर्क क्षमता और मजबूत होगी।
दो एक्सप्रेसवे के बीच बनेगा सीधा संपर्क
नई योजना के तहत आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा। इसके बनने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से आने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के भीड़भाड़ वाले मार्गों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। यात्री एक एक्सप्रेसवे से सीधे दूसरे एक्सप्रेसवे पर पहुंच सकेंगे, जिससे यात्रा का समय कम होगा और लंबी दूरी का सफर अधिक सुविधाजनक बन जाएगा।
किसानों की सहमति से बढ़ी परियोजना की रफ्तार
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए लखनऊ और उन्नाव जिले के कई गांवों की भूमि अधिग्रहित की जानी है। प्रशासन के अनुसार करीब 3,000 किसानों ने अपनी जमीन देने के लिए सहमति जता दी है। इससे परियोजना के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौती काफी हद तक दूर हो गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि शेष भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी हो जाएगी और निर्माण कार्य तय समय के अनुसार आगे बढ़ सकेगा।
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मुआवजे को लेकर सरकार का बड़ा आश्वासन
जमीन देने वाले किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आकर्षक मुआवजा पैकेज की घोषणा की है। अधिकारियों के मुताबिक किसानों को डीएम सर्किल रेट का चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। संशोधित सर्किल रेट लागू होने के बाद कई किसानों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान मिलने की संभावना है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
व्यापार और परिवहन क्षेत्र को मिलेगा लाभ
यह लिंक एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। दिल्ली से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले मालवाहक वाहन बिना शहरी ट्रैफिक में फंसे तेज गति से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे परिवहन लागत कम होगी, ईंधन की बचत होगी और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने के बाद उत्तर भारत के सड़क नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ जाएगी।