लखनऊ। योगी मंत्रिमंडल विस्तार ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक रणनीति का नया अध्याय खोल दिया। कुल 60 सदस्यों की अधिकतम क्षमता तक पहुंचते हुए छह नए चेहरों और दो प्रोन्नतियों के जरिए पार्टी ने बड़े जातीय खेमों के बजाय माइक्रो-कास्ट कोएलिशन पर दांव खेला है। यह ऐसी चतुराई है जो मुख्यधारा की मीडिया रिपोर्ट्स में सिर्फ सतही जातीय गिनती तक सीमित रही, लेकिन उसकी गहराई में 2027 की सूक्ष्म लड़ाई छिपी है।
निर्णायक उप जातियों को किया संतुष्ट
भूपेंद्र चौधरी (जाट, पश्चिमी यूपी) और मनोज पांडे (ब्राह्मण, रायबरेली-ऊंचाहार, पूर्व सपा) को कैबिनेट मंत्री बनाकर सवर्ण और जाट वोटों को मजबूत किया गया। राज्य मंत्री पदों पर कृष्णा पासवान (पासी, फतेहपुर), सुरेंद्र दिलेर (वाल्मीकि, अलीगढ़/बुलंदशहर), कैलाश राजपूत (लोधी/ओबीसी, कन्नौज) और हंसराज विश्वकर्मा (विश्वकर्मा, पूर्वांचल-वाराणसी) को जगह देकर छोटी-छोटी लेकिन निर्णायक उप-जातियों को संतुष्ट किया गया। अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार देकर ओबीसी बैकवर्ड्स में गहराई बढ़ाई गई।
छोटी जातियों की कराई मिनी लैडिंग
यह विस्तार महज जातीय बैलेंस नहीं, बल्कि 'एंटी-पीडीए माइक्रो-इंजीनियरिंग' है। अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को बड़े खेमों में तोड़ने के बजाय भाजपा ने छोटी जातियों को अलग-अलग 'मिनी-लैंडिंग' दी है। पासी और वाल्मीकि जैसे दलित उप-समूहों को, लोधी-विश्वकर्मा जैसे गैर-यादव ओबीसी को और जाट+ब्राह्मण को एक साथ साधकर पार्टी ने एक ऐसा जाल बिछाया है जो पीडीए की व्यापक लेकिन ढीली संरचना को सूक्ष्मता से चुनौती देता है।
क्षेत्रीय असंतुलन को सुधारने की कोशिश
क्षेत्रीय रूप से पश्चिम (जाट+वाल्मीकि), अवध (ब्राह्मण), पूर्वांचल (विश्वकर्मा) और मध्य यूपी (पासी+लोधी) का संतुलन बिठाया गया जो 2024 लोकसभा परिणामों के बाद क्षेत्रीय असंतुलन को सुधारने की कोशिश है। यह रणनीति 2027 में भाजपा को 'सभी के लिए कुछ-कुछ' देने का फॉर्मूला देती है, जहां हर छोटी जाति को लगे कि उसकी आवाज कैबिनेट तक पहुंच गई।
तनाव पैदा कर सकता है पोर्टफोलियो का बटवारा
हालांकि चुनौती यह है कि इतने माइक्रो-समूहों का प्रबंधन और पोर्टफोलियो बंटवारा संगठनात्मक तनाव भी पैदा कर सकता है। योगी कैबिनेट का यह विस्तार 2027 की 'माइक्रो-मैजिक' की पूर्वपीठिका तैयार करता दिख रहा है, जहां बड़ी जातियों की राजनीति को छोटी-छोटी जीतों के योग से हराया जाएगा।