अहोई अष्टमी व्रत संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति की कामना के लिए रखा जाता है। यह पर्व करवाचौथ के बाद और दीपावली से पहले मनाया जाता है। इस साल अहोई अष्टमी की तारीख को लेकर भक्तों में दुविधा है कि व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाए या 14 अक्टूबर को। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, पंचांग गणना के अनुसार इस बार अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। आइए जानें शुभ योग, पूजा विधि और महत्व।
अहोई अष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के मुताबिक, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर दोपहर 12:24 बजे से शुरू होकर 14 अक्टूबर दोपहर 1:09 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्यास्त से पहले अष्टमी तिथि रहती है। इसलिए इस वर्ष अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा।
पूजा मुहूर्त: शाम 5:53 बजे से 7:08 बजे तक
तारों को अर्घ्य देने का समयa: शाम 6:17 बजे
चंद्रोदय: रात 11:20 बजे
अहोई अष्टमी पर बन रहे शुभ योग
इस बार अहोई अष्टमी पर चार विशेष योग बन रहे हैं — रवि योग, परिघ योग, शिव योग और पुनर्वसु नक्षत्र। इन योगों में किया गया व्रत और पूजन अत्यंत शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इन शुभ संयोगों में अहोई माता की आराधना से संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और जीवन में मंगल की प्राप्ति होती है।
अहोई माता की पूजा विधि
इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले स्नान कर निर्जल व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम को अहोई माता की तस्वीर या दीवार पर बनाए चित्र के सामने दीप जलाकर पूजा की जाती है। पूजा के दौरान कथा सुनना, जल और चावल से अर्घ्य देना शुभ माना गया है। पूजा के बाद माताएं तारों या चांद को देखकर व्रत का पारण करती हैं।
संतान सुख और व्रत का महत्व
अहोई अष्टमी व्रत मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं। निःसंतान महिलाओं के लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी है — ऐसी मान्यता है कि अहोई माता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है।