
करवा चौथ के बाद आने वाला अहोई अष्टमी व्रत माताओं के लिए एक अत्यंत पूजनीय और भावनात्मक पर्व होता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखद भविष्य की कामना के लिए रखा जाता है। 2025 में अहोई अष्टमी का पर्व 29 अक्टूबर, बुधवार को मनाया जाएगा। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, खासकर उन महिलाओं द्वारा जो मां बन चुकी होती हैं या संतान की प्राप्ति की कामना करती हैं।
अहोई अष्टमी व्रत की तिथि और पूजा मुहूर्त
तिथि: 29 अक्टूबर 2025, बुधवार
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर को सुबह 09:15 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 30 अक्टूबर को सुबह 06:30 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:45 बजे से 07:00 बजे तक (स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है)
चंद्र दर्शन: रात्रि 08:50 बजे के आसपास
क्यों किया जाता है यह व्रत?
अहोई अष्टमी व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की कुशलता और उन्नति के लिए रखती हैं। करवा चौथ जहां पति की लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है, वहीं अहोई अष्टमी का केंद्रबिंदु संतान होती है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले भोजन कर व्रत का संकल्प लेती हैं और फिर दिनभर निर्जल रहकर शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं। रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
इस व्रत से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक महिला से गलती से एक साही के बच्चे की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद उसकी संतान को कष्ट होने लगे। पश्चाताप स्वरूप जब उसने अहोई माता का व्रत कर क्षमा याचना की, तब उसकी संतान स्वस्थ हुई और उसका जीवन सुखमय बना। तभी से यह व्रत संतान की भलाई के लिए एक विशेष स्थान रखता है।अहोई अष्टमी न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ पर्व है, बल्कि यह मातृत्व की भावना और परिवार के प्रति निःस्वार्थ प्रेम को भी दर्शाता है। करवा चौथ के बाद आने वाला यह व्रत मां और संतान के बीच के अटूट रिश्ते को और भी मजबूत करता है।