
World Lung Cancer Day: फेफड़ों का कैंसर उन गंभीर बीमारियों में से एक है, जिसकी पहचान अक्सर देर से होती है, जिससे इलाज के विकल्प सीमित हो जाते हैं। लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस बड़ी चुनौती से निपटने में मददगार साबित हो रहा है। मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI आधारित प्रेडिक्टिव हेल्थ सिस्टम लंग कैंसर की शुरुआती पहचान, जोखिम मूल्यांकन और इलाज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। AI, मेडिकल डेटा का तेजी से विश्लेषण कर संभावित लक्षणों को पकड़ने में सक्षम होता है, जिससे मरीज को समय रहते उपचार मिल सके।
मशीन लर्निंग से स्कैनिंग और जोखिम आकलन आसान
AI आधारित सिस्टम खासकर मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग तकनीकों की मदद से सीटी स्कैन, एक्स-रे और PET स्कैन की इमेज को पढ़कर कैंसर के शुरुआती संकेत पहचानते हैं। यह सिस्टम हजारों मरीजों के पुराने डेटा से सीखता है और यह तय करता है कि किन गांठों पर ध्यान देना जरूरी है। इसके अलावा, मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, धूम्रपान की आदत और जेनेटिक फैक्टर्स को ध्यान में रखते हुए उसका रिस्क स्कोर भी तय किया जाता है, जिससे हाई-रिस्क मरीजों की पहले से स्क्रीनिंग की जा सके।
यह भी देखेंःPM Modi reply Trump: PM मोदी का ट्रम्प को करारा जवाब, F-35 डील से इनकार कर भारत ने दिखाया आत्मनिर्भरता का दम
इलाज के चयन में भी देता है डॉक्टरों को सहारा
AI अब सिर्फ पहचान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इलाज की रणनीति तय करने में भी डॉक्टरों का मार्गदर्शन कर रहा है। यह तकनीक तय करती है कि मरीज को इम्यूनोथेरेपी दी जाए या टारगेटेड थेरेपी, जिससे ट्रीटमेंट अधिक प्रभावी हो सके। भारत में कुछ निजी अस्पताल और हेल्थ स्टार्टअप इस दिशा में काम कर रहे हैं, हालांकि सरकारी स्तर पर भी इसके विस्तार की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI अब भविष्य नहीं, बल्कि आज का समाधान बन चुका है, जिससे लंग कैंसर जैसे जानलेवा रोग की समय पर पहचान और इलाज संभव हो सके।