Unmanned Space Mission: हाल ही में PSLV-C62 मिशन के असफल होने के बाद ISRO के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. वेंकटेश्वर शर्मा ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने साफ किया कि किसी एक मिशन की विफलता से दीर्घकालिक योजनाओं पर असर नहीं पड़ता। भारत का फोकस अब मानव अंतरिक्ष उड़ान, अपना स्पेस स्टेशन और आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक पर है।
PSLV-C62 मिशन और तकनीकी पहलू
डॉ. शर्मा के अनुसार 44.4 मीटर ऊंचा और 260 टन वजनी PSLV-C62 तकनीकी कारणों से अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो सका। यह रॉकेट सॉलिड और लिक्विड चरणों के संयोजन पर आधारित था। इस मिशन से मिले डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचा जा सके।
EOS-N1 उपग्रह का रणनीतिक महत्व
इस मिशन का मुख्य पेलोड EOS-N1 (अन्वेषा) उपग्रह था, जिसे ISRO और DRDO ने मिलकर विकसित किया। यह उपग्रह हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग, पर्यावरण निगरानी और रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयार किया गया था। इसे कम से कम पांच वर्षों तक उपयोगी रहने के लिए डिजाइन किया गया है।
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गगनयान और मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारी
डॉ. शर्मा ने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के तहत 2026 की शुरुआत में पहला मानव रहित मिशन लॉन्च करने की योजना है। तीन सफल मानवरहित उड़ानों के बाद 2027 में भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेज सकता है। इसके लिए LVM3 रॉकेट को मानव मिशन के अनुकूल बनाया जा रहा है।
भारत अंतरिक्ष स्टेशन और युवाओं के लिए संदेश
उन्होंने पुष्टि की कि 2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन तैयार करने का लक्ष्य है। साथ ही उन्होंने युवाओं से कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र केवल इंजीनियरों तक सीमित नहीं है। विज्ञान, कला, प्रबंधन और तकनीकी हर क्षेत्र के युवाओं के लिए इसमें अवसर हैं, बस अपने काम में उत्कृष्टता जरूरी है।