Air India 10000 Crore Loan : टाटा ग्रुप की एयरलाइन Air India एक बार फिर बड़े वित्तीय फैसले को लेकर चर्चा में है। कंपनी करीब 10 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाने की तैयारी में है, लेकिन इस बार बैंकों ने बिना सवाल पूछे आगे बढ़ने का मन नहीं बनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ निजी बैंकों ने एयरलाइन के कैशफ्लो, भविष्य की कमाई और कारोबार को मुनाफे में लाने की रणनीति पर अतिरिक्त जानकारी मांगी है। एयर इंडिया इस रकम का इस्तेमाल अपने विमान बेड़े के विस्तार, पुराने विमानों के रिफर्बिशमेंट और रोजमर्रा के ऑपरेशनल खर्चों के लिए करना चाहती है। हालांकि लगातार बढ़ते घाटे ने कर्जदाताओं को सतर्क कर दिया है। यही वजह है कि फंडिंग से पहले एयरलाइन की वित्तीय स्थिति का गहराई से आकलन किया जा रहा है।
घाटे के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
Air India के वित्तीय आंकड़े भी बैंकों की चिंता की बड़ी वजह बने हुए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 10,858 करोड़ रुपये था। यानी एक साल के भीतर घाटा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। विदेशी मुद्रा विनिमय से होने वाला नुकसान भी तेजी से बढ़ा है। FY26 में फॉरेन एक्सचेंज लॉस 7,388 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जबकि FY25 में यह 1,545 करोड़ रुपये था। ऐसे में बैंकों का मानना है कि सिर्फ विस्तार की योजनाएं ही नहीं, बल्कि भविष्य में कर्ज चुकाने की क्षमता को भी स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। यही कारण है कि एयरलाइन के वित्तीय मॉडल पर अतिरिक्त सवाल उठाए जा रहे हैं।
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AAA रेटिंग के बावजूद क्यों उठ रहे सवाल?
दिलचस्प बात यह है कि Air India के पास AAA क्रेडिट रेटिंग मौजूद है, जिसे बाजार में सबसे सुरक्षित श्रेणी माना जाता है। इसके बावजूद कुछ कर्जदाता पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुछ बैंक एयर इंडिया के बोर्ड ढांचे और टाटा संस के नेतृत्व को लेकर भी अधिक स्पष्टता चाहते हैं। एन. चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन होने के साथ एयर इंडिया बोर्ड की भी अगुवाई कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकारी बैंक अपेक्षाकृत सकारात्मक नजर आ रहे हैं और मौजूदा क्रेडिट लाइन को आगे बढ़ाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं। इसके पीछे टाटा ग्रुप की मजबूत साख और एयर इंडिया की रेटिंग को अहम कारण माना जा रहा है।
टाटा ग्रुप का बड़ा दांव जारी
Air India के लिए राहत की बात यह है कि टाटा ग्रुप लगातार कंपनी के साथ खड़ा नजर आ रहा है। टाटा संस पहले ही एयरलाइन में अपनी कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखने का भरोसा दे चुका है। फिलहाल टाटा संस के पास 74.9 प्रतिशत और सिंगापुर एयरलाइंस के पास 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जून महीने में टाटा संस बोर्ड ने एयर इंडिया में 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की नई पूंजी लगाने को भी मंजूरी दी थी। यह 2021 में एयरलाइन के अधिग्रहण के बाद सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है। वहीं एयर इंडिया पर पहले से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, जिसमें SBI सबसे बड़ा कर्जदाता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि बैंकों की जांच और सवालों के बाद एयर इंडिया अपनी नई फंडिंग योजना को कितनी तेजी से आगे बढ़ा पाती है।