देश की विमानन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संसद में सामने आए आंकड़ों ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार ने बताया है कि एयर इंडिया के हर दस में से सात विमानों में तकनीकी खराबियां पाई गई हैं। साथ ही अन्य प्रमुख एयरलाइंस के विमानों में भी बार-बार गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। इन खुलासों के बाद डीजीसीए की निगरानी और जांच प्रक्रिया पर भी चर्चा तेज हो गई है।
एयर इंडिया में सबसे ज्यादा तकनीकी समस्याएं
लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि जनवरी 2025 से इस साल 3 फरवरी तक कई एयरलाइंस के विमानों का विश्लेषण किया गया। इसमें एयर इंडिया के 166 विमानों में से 137 में बार-बार तकनीकी खामियां सामने आईं, यानी करीब 70 प्रतिशत विमान प्रभावित पाए गए। आंकड़ों के मुताबिक, अन्य एयरलाइंस की तुलना में एयर इंडिया के विमानों में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां दर्ज की गईं।
इंडिगो और एयर इंडिया एक्सप्रेस के आंकड़े
मंत्री ने बताया कि बार-बार खराबी के मामलों को लेकर इंडिगो के 405 विमानों की जांच की गई, जिनमें से 148 विमानों में तकनीकी दिक्कतें मिलीं। वहीं एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 विमानों में ऐसी समस्याएं सामने आईं। सरकार के मुताबिक, कुल मिलाकर विभिन्न एयरलाइंस के 377 विमानों में बार-बार गड़बड़ी होने की पुष्टि हुई है।
स्पाइसजेट और अकासा एअर भी सूची में
सरकारी आंकड़ों में यह भी बताया गया कि स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 विमानों में तकनीकी खराबियां दर्ज की गईं। इसके अलावा अकासा एअर के 32 विमानों में से 14 विमानों में बार-बार दिक्कतें पाई गईं। इन आंकड़ों से साफ है कि समस्या सिर्फ एक एयरलाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि कई कंपनियों को इससे जूझना पड़ रहा है।
डीजीसीए की सख्त निगरानी और हजारों निरीक्षण
विमानन सुरक्षा नियामक डीजीसीए ने इसी अवधि में 3,890 निगरानी निरीक्षण किए। मंत्री ने बताया कि सभी विमानों और हवाई अड्डा संचालकों के लिए नियमों और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के पालन को लेकर नियमित निगरानी, अचानक जांच और नियामक ऑडिट किए जाते हैं। ऑडिट के दौरान यदि कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित एयरलाइन को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाते हैं।
पिछले वर्षों की तुलना में घटनाओं में गिरावट
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों में उड़ानों में तकनीकी खराबी के मामलों में धीरे-धीरे कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 448 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 421 रह गई। गत वर्ष कुल 353 तकनीकी गड़बड़ी के मामले सामने आए, जिसे सुरक्षा उपायों के असर के रूप में देखा जा रहा है।