12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इस भयावह हादसे के ठीक एक महीने बाद भारत सरकार के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी कर दी है. इस रिपोर्ट में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के जरिए दोनों पायलटों के बीच हुई आखिरी बातचीत का भी खुलासा हुआ है. यह हादसा अब तक का सबसे गंभीर विमान हादसों में से एक माना जा रहा है. कॉकपिट की बातचीत ने हादसे को और रहस्यमय बना दिया है. लाखों लोगों की नजरें इस जांच पर टिकी हैं.
क्या हुआ टेकऑफ के बाद?
रिपोर्ट के मुताबिक़, विमान जैसे ही टेकऑफ करता है, लगभग 13:38:42 पर उसकी स्पीड 180 नॉट्स तक पहुंच जाती है. लेकिन इसके कुछ ही सेकेंड बाद, विमान के दोनों इंजन (इंजन 1 और इंजन 2) के फ्यूल स्विच ‘RUN’ (चालू) से ‘CUTOFF’ (बंद) पोजिशन में चले जाते हैं.मतलब, दोनों इंजनों को ईंधन मिलना अचानक बंद हो जाता है.
पायलटों के बीच क्या बातचीत हुई?
जैसे ही इंजन बंद हुए, कॉकपिट में मौजूद पायलटों में से एक ने दूसरे से सवाल किया कि तुमने कटऑफ क्यों किया? जिस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि मैंने कुछ नहीं किया. ये बातचीत रिकॉर्डर में दर्ज है, लेकिन रिपोर्ट में यह साफ़ नहीं बताया गया है कि इनमें से कौन-सी आवाज़ कैप्टन सुमित सभरवाल की थी और कौन-सी फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर की. कुछ ही सेकंड बाद, एक पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को "मेडे-मेडे-मेडे" कॉल भेजी, लेकिन इसके बाद कोई और जवाब नहीं दिया गया. ATC ने कुछ ही देर में विमान को हॉस्टल की इमारत पर गिरते देखा.
हादसे की वजह अभी साफ नहीं
रिपोर्ट में दो अहम बातें कही गई हैं-
1. टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों के फ्यूल कटऑफ स्विच अपने आप बंद हो गए.
2. पायलटों ने इंजन बंद करने की बात से इनकार किया.
अब तक ये तय नहीं हो पाया है कि यह हादसा मानवीय गलती थी या फिर किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ. जांच अभी जारी है और इसकी असली वजह सामने आने में थोड़ा और वक्त लग सकता है.
हादसे के दौरान विमान में कौन-कौन थे?
इस फ्लाइट में कुल 242 यात्री, 2 पायलट और 10 केबिन क्रू सवार थे. कैप्टन सुमित सभरवाल के पास 8,200 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव था. जबकि फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर ने 1,100 घंटे तक विमान उड़ाया था. दोनों पायलट मुंबई के रहने वाले थे और उड़ान से पहले उन्हें पूरा आराम मिला था.
हादसे में कितने लोगों की जान गई?
इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 260 लोगों की मौत हो गई. इनमें से अधिकांश लोग मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में रह रहे रेज़िडेंट डॉक्टर और छात्र थे, जो उस समय हॉस्टल के डाइनिंग हॉल में लंच कर रहे थे.
हादसे में “अतुल्यम 1, 2, 3 और 4” नाम की हॉस्टल इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं. विमान हादसे में सिर्फ एक शख्स विश्वास कुमार रमेश को छोड़कर किसी और की जान नहीं बच सकी. वह विमान के टूटे हिस्से से बाहर गिरकर किसी तरह बच पाए.