Air India Investment : लगातार बढ़ते घाटे और कर्ज के दबाव से जूझ रही एयर इंडिया को बड़ी वित्तीय मदद मिलने जा रही है। टाटा संस के बोर्ड ने एयर इंडिया में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की नई पूंजी लगाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। वर्ष 2021 में एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद यह टाटा समूह के सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है। हालांकि यह मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गई है।
जून की बैठक में हुआ फैसला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह निर्णय जून में हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में लिया गया था। बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने की थी। इसमें टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन भी मौजूद थे। टाटा संस के नियमों के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक के किसी भी निवेश के लिए टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों का समर्थन आवश्यक होता है।
निवेश के साथ रखी गई शर्त
सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया को पूंजी मिलने से पहले विस्तृत कारोबारी योजना पेश करनी होगी। कंपनी को यह बताना होगा कि निवेश का उपयोग किस तरह किया जाएगा और इससे कारोबार को क्या लाभ होगा। बताया जा रहा है कि टाटा संस ने पिछले एक वर्ष से अधिक समय से एयर इंडिया में प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश को रोक रखा था। अब नई पूंजी से कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
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रिकॉर्ड घाटा बना चिंता
वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। माना जाता है कि कंपनी के बढ़ते नुकसान ने समूह के भीतर भी चिंता बढ़ाई थी। यही वजह रही कि एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति लगातार चर्चा का विषय बनी रही। पिछले महीने एन चंद्रशेखरन ने भी अपने तीसरे कार्यकाल की दावेदारी नहीं करने का फैसला किया था।
कर्ज का बढ़ता बोझ
एयर इंडिया पर बैंकों का कुल बकाया लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इनमें सबसे बड़ा जोखिम भारतीय स्टेट बैंक का है, जिसका एक्सपोजर 18,500 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा का बकाया करीब 5,938 करोड़ रुपये है। बढ़ते कर्ज और घाटे के कारण कंपनी पर वित्तीय दबाव लगातार बना हुआ है।
हिस्सेदारी पर भी नजर
वर्तमान में एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी 73.8 प्रतिशत है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास 24.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यदि सिंगापुर एयरलाइंस अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखना चाहती है तो उसे भी करीब 3,350 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में एयर इंडिया की वित्तीय पुनर्बहाली और निवेशकों की रणनीति पर सभी की नजर बनी रहेगी।