
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के वजह से लोगा बीमार पड़ रहे हैं। लोगों की सेहत पर इसका असर हो रहा है। दिवाली के बाद हर साल की तरह इस बार भी एक्यूआई का लेवल खतरनाक हालात में पहुंच चुका है। ये औसतन 300 के आसपास पहुंच चुका है। इसके कारण लोगों को आखों में जलन और सांस लेने की समस्या सामना करना पड़ रहा है।
कृषि अवशेषों से होने वाला प्रदूषण है
बढ़ते प्रदूषण से होने वाली बीमारियों को लेकर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल के पल्मोनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार, डॉ. अवि कुमार का कहना है, "इस दिवाली के मौसम और कृषि अवशेषों के जलने, जैविक कचरे को गर्म करने और जलाने के कारण, दिवाली के बाद के मौसम में प्रदूषण बढ़ गया है। सबसे महत्वपूर्ण कारण जिसका हम आज मुकाबला कर रहे हैं, वह है दिवाली के बाद का प्रदूषण, वाहनों से होने वाला प्रदूषण और कृषि अवशेषों से होने वाला प्रदूषण है।
ऐसी शिकायत लेकर आ रहे
डाक्टर का कहना रेहै कि हमा ज़्यादातर मरीज़ हमारी ओपीडी में सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट, नाक बंद होने, आंखों में खुजली, बलगम वाली खांसी की शिकायत लेकर आते हैं, और कुछ मरीज़ों को वायु प्रदूषण के कारण बुखार और निमोनिया जैसी आपात हालत होती है। ओपीडी में 10 से 15% की वृद्धि हुई है। बच्चे ज़्यादा असुरक्षित स्थिति में हैं। इसकी वजह यह है कि उन्हें सुबह वायु प्रदूषण के चरम समय में उठना पड़ता है। उन्हें स्कूल जाना होता है। बच्चों को निमोनिया और एलर्जी होने का ख़तरा ज़्यादा होता है। मैं माता-पिता को सलाह देता हूं कि वे बच्चों को मास्क पहनाएं।