Air Pollution : वायु‑प्रदूषण आज सिर्फ मौसम का विषय नहीं रहा, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है. World Health Organization (WHO) के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख लोग बाहरी वायु‑प्रदूषण (PM2.5 सहित) के कारण बीमारियों के शिकार होते हैं और इसके कारण सैकड़ों हजार की मृत्यु होती है। वर्ष 2025 में भी इस स्थिति में कोई राहत नहीं दिख रही है. ताज़ा आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि हम गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं.
मौतों का बड़ा आंकड़ा
नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2023 में वायु‑प्रदूषण से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी मृत्यु की संख्या लगभग 20 लाख (2 मिलियन) तक पहुँच गई है. वर्ष 2022 के लिए भी लगभग 17.2 लाख (1.72 मिलियन) मौतें अनुमानित की गई थीं. इसका मतलब है कि हर दिन हजारों लोग “साफ‑हवा का अधिकार” नहीं पा रहे और उनका जीवन वायु‑प्रदूषण के कारण खतरे में है. उदाहरण के तौर पर, राजधानी दिल्ली में वर्ष 2023 में लगभग 17,188 लोग वायु‑प्रदूषण‑प्रभावित कारणों से मारे गए, जो कि शहर की कुल मृत्यु का करीब 15 % है.
बच्चों, बड़ों और रोगियों पर असर
वायु‑प्रदूषण सिर्फ मौत तक सीमित नहीं है; यह बड़े पैमाने पर बीमारियाँ उत्पन्न कर रहा है. उदाहरण के लिए, भारत में प्रतिदिन लगभग 464 बच्चों (5 साल से कम उम्र के) की मृत्यु वायु‑प्रदूषण‑प्रभावित कारणों से होती है। इंजुरी‑रहित जीवन की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ रही है, और बुजुर्ग तथा पहले से रोगग्रस्त (हृदय रोग, फेफड़े की बीमारी, डायबिटीज आदि) लोग विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं. रिपोर्ट्स यह भी दिखाती हैं कि महिलाओं और बच्चों में वायु‑प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों (जैसे COPD, हाई ब्लड प्रेशर, कम वजन वाला बच्चा, निम्न श्वसन संक्रमण) की दर में वृद्धि हो रही है.
क्यों बढ़ रही है समस्या?
इस संकट के पीछे कई वजहें हैं: कोयला‑उर्जा पर निर्भरता, वाहनों का उत्सर्जन, कृषि में पराली जलाना, घरेलू स्तर पर ठोस ईंधन का इस्तेमाल, औद्योगिक गतिविधियाँ आदि. इन कारणों से निकलने वाले PM2.5 और अन्य हानिकारक कण वायु में घुलते हैं और हमारी सांसों में पहुँचते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत WHO की सिफारिशों (हवा में PM2.5 का औसत 5 µg/m³) के अनुरूप हो जाए, तो जीवन प्रत्याशा में औसतन 3.5 से 8 साल तक की बढ़ोतरी हो सकती थी.
आगे क्या किया जाना चाहिए?
स्थिति को बदलने के लिए तत्पर कदम उठाना ज़रूरी है. निजी स्तर पर मास्क पहनना, घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल, धुंआ‑स्रोतों से दूरी बनाना जैसे उपाय हो सकते हैं. सार्वजनिक स्तर पर‑ वाहन उत्सर्जन नियंत्रण, कोयला‑उर्जा का विकल्प, पराली जलाने की रोक, स्वच्छ घरेलू ईंधन के प्रयोग को बढ़ावा देना आदि बहुत महत्वपूर्ण हैं. यदि हम कार्रवाई नहीं करेंगे, तो प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान खतरे में बनी रहेगी.
वायु‑प्रदूषण सिर्फ “खराब मौसम” नहीं, बल्कि हर दिन हजारों लोगों की ज़िन्दगी पर गंभीर असर डालने वाला खतरा है. हमें इस समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए—यह एक राष्ट्र‑स्वास्थ्य संकट है, जिसका समाधान अब समय की मांग है.