
Aja Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। प्रत्येक मास में दो एकादशियां आती हैं, जिनमें भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल बताया गया है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है, जो पुण्य फल प्रदान करने वाली और मोक्ष दिलाने वाली तिथियों में मानी जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और श्री हरि विष्णु की पूजा करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धि की ओर अग्रसर किया जा सकता है।
जानें कब है अजा एकादशी
वर्ष 2025 में अजा एकादशी 25 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि की शुरुआत 24 अगस्त को रात 09:16 बजे से होगी और इसका समापन 25 अगस्त को रात 07:25 बजे तक होगा। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त सूर्योदय से पूर्व स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं। व्रत का पारण यानी उपवास खोलने का समय अगले दिन 26 अगस्त 2025, मंगलवार को प्रातः 06:01 बजे से 08:29 बजे तक निर्धारित है। पारण से पूर्व पूजा-अर्चना और तुलसी जल अर्पण करना शुभ माना जाता है।
क्या हैं धार्मिक मान्यता?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हरिशचंद्र ने इस व्रत को करके न केवल अपने दुखों से मुक्ति पाई, बल्कि खोया हुआ राज्य और परिवार भी पुनः प्राप्त किया। इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से रखने पर आत्मिक उन्नति और जीवन में शांति का अनुभव होता है।इस एकादशी पर व्रती फलाहार करते हैं, व्रत कथा का श्रवण करते हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करते हैं। अजा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि यह आत्म-संयम, तपस्या और आध्यात्मिक जागरूकता का पर्व है, जो व्यक्ति को धर्म और भक्ति की सच्ची राह पर चलने की प्रेरणा देता है।