Ajab Gajab News : शादी एक पवित्र बंधन होता है, जिसमें दो लोग जीवनभर साथ रहने की कसमें खाते हैं। हर देश और संस्कृति में विवाह को लेकर अलग-अलग परंपराएं और रस्में होती हैं. भारत में जहां हल्दी, फेरे और कुमकुम जैसी रस्में आम हैं, वहीं दुनिया के कई हिस्सों में कुछ ऐसी अजीब और अनोखी शादी की रस्में निभाई जाती हैं, जिन्हें जानकर हैरानी होती है. ये रस्में कभी-कभी इतने विचित्र रूप में सामने आती हैं कि सुनने वाले को विश्वास ही नहीं होता. आइए जानते हैं दुनिया की पाँच सबसे अजीब और अनसुनी शादी की रस्मों के बारे में.
1. पेड़ से शादी – भारत (झारखंड और बिहार)
भारत के कुछ हिस्सों में, विशेष रूप से झारखंड और बिहार में, ऐसी मान्यता है कि अगर कोई लड़की मांगलिक दोष वाली है (मंगल दोष), तो उसकी पहली शादी एक पेड़ से करवाई जाती है, खासकर पीपल या केले के पेड़ से. यह रस्म इसलिए की जाती है ताकि असली पति पर कोई बुरा असर न पड़े. पेड़ से विवाह के बाद उसे काट दिया जाता है.
2. मृत व्यक्ति से विवाह – फ्रांस
फ्रांस में एक कानूनी परंपरा है जिसे पोस्टह्यूमस मैरिज कहते हैं. इसमें अगर किसी की सगाई हो चुकी हो और उसका मंगेतर मृत्यु को प्राप्त कर जाए, तो वह व्यक्ति सरकार की अनुमति लेकर मृत प्रेमी/प्रेमिका से शादी कर सकता है. यह परंपरा द्वितीय विश्व युद्ध के समय शुरू हुई थी.
3. दूल्हे को पीटना – दक्षिण कोरिया
कोरिया में शादी से पहले दूल्हे के पैरों को रस्सी से बांधकर उसकी तलवों पर मछली या डंडे से मारने की रस्म होती है. ऐसा माना जाता है कि इससे दूल्हे की सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की परीक्षा होती है. यह रस्म दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा हंसी-मजाक के रूप में की जाती है.
4. नकली रोना – चीन (तुजिया जनजाति)
चीन की तुजिया जनजाति में, शादी से एक महीने पहले दुल्हन को हर दिन एक घंटे रोने का अभ्यास करना होता है. धीरे-धीरे उसकी मां और परिवार की महिलाएं भी इसमें शामिल होती हैं. यह रोना दुख नहीं बल्कि खुशी और सम्मान के प्रतीक के रूप में किया जाता है.
5. इंसानों से नहीं, जानवरों से विवाह – इंडोनेशिया और थाईलैंड
कुछ द्वीपों और ग्रामीण इलाकों में यह परंपरा है कि अगर कोई व्यक्ति अशुभ घटनाओं से गुजर रहा हो, तो उसकी शादी किसी जानवर (जैसे कुत्ता या बकरी) से करवा दी जाती है ताकि बुरा साया हट जाए. यह प्रतीकात्मक विवाह होता है और बाद में तोड़ दिया जाता है.
इन अजीब रस्मों को देखकर लगता है कि शादी सिर्फ एक सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक यात्रा भी है जिसमें हर समाज की अपनी मान्यताएं और परंपराएं होती हैं – चाहे वे कितनी भी अनोखी क्यों न हों.