
भारत और अमेरिका के बीच इन दिनों रिश्तों में खटास साफ दिख रही है. खासकर रूस से जुड़े मामलों को लेकर दोनों देशों में टकराव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस के दौरे पर पहुंचे हैं. यह दौरा पहले से तय था, लेकिन हाल की घटनाओं की वजह से अब यह और ज्यादा अहम और रणनीतिक माना जा रहा है. इस समय भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आई तल्खी को कम करना और रूस के साथ सहयोग को संतुलित बनाए रखना एक बड़ा कूटनीतिक प्रयास है. अजीत डोभाल की यह यात्रा उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
ट्रंप की चेतावनी और नाराजगी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भारत को खुली चेतावनी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत रूस से बहुत ज्यादा कच्चा तेल खरीद रहा है और उसे प्रोसेस करके अच्छे मुनाफे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच रहा है. ट्रंप ने कहा कि अगर भारत ने अपनी नीति नहीं बदली तो अमेरिका 24 घंटे के भीतर भारतीय सामानों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगा देगा.
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अमेरिका ने अपना दूत भी भेजा
ट्रंप की सख्त टिप्पणियों के बाद अमेरिका ने अपना विशेष दूत भी रूस भेजा जो उसी विमान से पहुंचा जिसमें अजीत डोभाल भी सवार थे. इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच रूस को लेकर चल रही खींचतान कितनी गंभीर हो गई है.
डोभाल की यात्रा क्यों है अहम?
डोभाल की यह यात्रा अब केवल रूस से रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं रही. अब यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को दुनिया के सामने स्पष्ट करने का भी माध्यम बन गई है. भारत रूस से तेल और रक्षा उपकरण खरीदता रहा है और इन फैसलों में वह अमेरिका या किसी और देश की दखलअंदाजी पसंद नहीं करता.
नतीजा क्या होगा?
डोभाल का यह दौरा भारत के लिए कई मोर्चों पर रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश है. एक तरफ अमेरिका की चेतावनी और दूसरी तरफ रूस के साथ पुराने मजबूत रिश्ते—भारत को अब ऐसे फैसले लेने हैं जो राष्ट्रीय हित में हों और अंतरराष्ट्रीय दबाव से परे हों.