महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों तक निर्णायक भूमिका निभाने वाले अजित पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया। गुरुवार को बारामती में उनका अंतिम संस्कार होगा। छह बार उपमुख्यमंत्री, आठ बार विधायक और एक बार सांसद रहे अजित पवार ने सत्ता के हर बदलाव के बीच खुद को प्रासंगिक बनाए रखा। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, रणनीति और सत्ता संतुलन का अनोखा उदाहरण रहा।
सहकार से संसद तक: शुरुआती राजनीतिक सफर
22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवरा में जन्मे अजित पवार को बचपन से ही राजनीतिक माहौल मिला। उन्होंने 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड से राजनीति में कदम रखा। 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन बने और उसी साल बारामती से सांसद चुने गए। बाद में अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी और राज्य की राजनीति पर फोकस किया।
लगातार जीत और विधानसभा में दबदबा
1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अजित पवार कभी नहीं हारे। वे आठ बार विधायक बने और कांग्रेस व बाद में एनसीपी के टिकट पर कई चुनाव जीते। कृषि, ऊर्जा और योजना जैसे विभागों में मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक पकड़ मजबूत की और राज्य की राजनीति में खुद को केंद्रीय चेहरा बना लिया।
उपमुख्यमंत्री की कुर्सी और सत्ता संतुलन
अजित पवार छह बार उपमुख्यमंत्री बने। 2010 से 2012, फिर 2012 से 2014, 2019 में संक्षिप्त कार्यकाल, उसके बाद उद्धव ठाकरे सरकार में वापसी और 2023 व 2024 में फिर से उपमुख्यमंत्री बने। अलग–अलग गठबंधनों के बावजूद सत्ता संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम रही, जिससे वे हर सरकार में प्रभावी बने रहे।
मुख्यमंत्री बनने से चूक और अधूरी महत्वाकांक्षा
2004 के चुनावों के बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि अजित पवार मुख्यमंत्री बन सकते थे, लेकिन राजनीतिक समीकरणों के कारण मौका हाथ से निकल गया। इसके बाद वे बार–बार सत्ता के बेहद करीब रहे, मगर शीर्ष पद तक नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद वित्त मंत्री के तौर पर सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड उनके नाम रहा।
परिवार से अलग राह और राजनीतिक विरासत
2023 में अजित पवार ने अलग गुट बनाकर नई राजनीतिक दिशा चुनी, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। बाद में चुनाव आयोग से पार्टी का नाम और चिन्ह मिलने के बाद समीकरण और बदल गए। उनके अचानक निधन के बाद अब सवाल उठ रहा है कि पार्टी की कमान कौन संभालेगा और क्या भविष्य में पारिवारिक एकजुटता फिर देखने को मिलेगी।