भारतीय क्रिकेट में कई ऐसी कहानियां हैं जो प्रेरणा देती हैं, और अजितेश अर्गल की कहानी भी उन्हीं में से एक है। साल 2008 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उस टीम की कप्तानी विराट कोहली कर रहे थे। फाइनल मुकाबले में अजितेश ने शानदार गेंदबाजी करते हुए सिर्फ 7 रन देकर 2 विकेट लिए थे और टीम को जीत दिलाने में बड़ा योगदान दिया था।
आईपीएल में नहीं मिला खेलने का मौका
अंडर-19 में चमकने के बावजूद उनका करियर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। आईपीएल के पहले सीजन में उन्हें किंग्स इलेवन पंजाब ने खरीदा, लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। घरेलू क्रिकेट में भी वह ज्यादा मौके हासिल नहीं कर सके। लगभग एक दशक में उन्होंने सीमित मैच ही खेले, जिससे उनका क्रिकेट करियर धीमा पड़ गया।
सरकारी नौकरी की ओर बढ़ा कदम
क्रिकेट में ज्यादा सफलता नहीं मिलने के बाद अजितेश अर्गल ने एक स्थिर करियर का रास्ता चुना। उन्होंने स्पोर्ट्स कोटा के जरिए इनकम टैक्स विभाग में नौकरी हासिल की और धीरे-धीरे पेशेवर क्रिकेट से दूरी बना ली। हालांकि उनके अंदर क्रिकेट के लिए जुनून कभी खत्म नहीं हुआ और वह खेल से जुड़े रहने का रास्ता तलाशते रहे।
2023 में लिया बड़ा फैसला
साल 2023 में उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया और बीसीसीआई की अंपायरिंग परीक्षा पास कर ली। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और महिला प्रीमियर लीग में अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करते हुए उन्होंने अपनी पहचान एक अंपायर के रूप में बनाई और अब आईपीएल जैसे बड़े मंच तक पहुंच गए हैं।
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आईपीएल 2026 में अंपायर के रूप में डेब्यू
आईपीएल 2026 के 32वें मुकाबले में, जो राजस्थान और लखनऊ के बीच खेला गया, अजितेश अर्गल ने बतौर अंपायर डेब्यू किया। यह उनके करियर का नया और अहम पड़ाव है। एक समय जो खिलाड़ी मैदान पर गेंदबाजी करता था, आज वही मैदान पर फैसले लेता नजर आ रहा है।
संघर्ष और वापसी की मिसाल
अजितेश अर्गल की कहानी यह दिखाती है कि अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता तलाशा जा सकता है। उन्होंने हार नहीं मानी और क्रिकेट से जुड़ने का नया तरीका चुना। आज वह आईपीएल में अंपायर बनकर एक नई पहचान बना चुके हैं।