उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच सियासी बयानबाजी का नया दौर देखने को मिल रहा है। कभी गठबंधन के साथी रहे अखिलेश यादव और जयंत चौधरी अब एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए अल्फाबेट यानी अंग्रेजी के अक्षरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी शुरुआत ‘चवन्नी से रुपया’ वाले तंज से हुई और फिर मामला ABCD से होते हुए G-J और अब XYZ तक पहुंच गया है। दोनों नेताओं के बयानों में पश्चिमी यूपी, किसान और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत का मुद्दा भी लगातार दिखाई दे रहा है।
चवन्नी से शुरू हुई सियासी जंग
अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया’ बनाने वाले बयान के बाद सपा के प्रदेश अध्यक्ष ने ABCD के जरिए पलटवार किया। जयंत चौधरी ने इन टिप्पणियों को चौधरी चरण सिंह, किसानों और जाट समाज के अपमान से जोड़ते हुए जवाब दिया। 3 सितंबर को सहारनपुर की रैली में आरएलडी ने बड़े पर्दे पर सपा नेताओं के पुराने बयानों का वीडियो चलाया। इसके बाद चौधरी चरण सिंह और अजीत सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़े वीडियो दिखाकर संदेश देने की कोशिश की गई कि आरएलडी खुद को उसी विरासत का उत्तराधिकारी मानती है।
जयंत ने G और J से दिया जवाब
सहारनपुर की रैली में जयंत चौधरी ने अपने अंदाज में सपा पर निशाना साधा और Alphabet War को आगे बढ़ाते हुए G और J का इस्तेमाल किया। उनका संदेश सीधे तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपने समर्थक सामाजिक समूहों से जुड़ा रहा। इसके जवाब में अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर XYZ का जिक्र करते हुए पलटवार किया। इससे दोनों दलों के बीच चल रही यह जुबानी जंग अब राजनीतिक संदेश और चुनावी रणनीति का हिस्सा बनती नजर आ रही है।
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गठबंधन और टिकट को लेकर भी तंज
इससे पहले अखिलेश यादव ने सीट बंटवारे को लेकर भी जयंत पर अप्रत्यक्ष तंज किया था। उन्होंने कहा था कि गठबंधन के जरिए चुनाव जीतने वाले कुछ लोगों को अगर टिकट नहीं मिलता तो समाजवादी पार्टी उन पर विचार कर सकती है और पार्टी में आने वालों को सम्मान दिया जाएगा। अखिलेश का यह बयान जयंत चौधरी की सहारनपुर रैली से ठीक पहले आया था। ऐसे में इसे आरएलडी के नेताओं और समर्थकों के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा गया।
पश्चिमी यूपी में जाट वोट पर नजर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश आगामी चुनाव में दोनों दलों के लिए अहम क्षेत्र है। जाट समुदाय की संख्या सीमित होने के बावजूद क्षेत्र की राजनीति में उसका प्रभाव माना जाता है। जयंत चौधरी ने सहारनपुर की रैली में सिर्फ जाटों की बात करने के बजाय चौधरी चरण सिंह की विरासत को 36 बिरादरी से जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने पाल, गुर्जर, यादव और जाटव समेत कई सामाजिक समूहों को चौधरी चरण सिंह से जोड़ते हुए सपा नेताओं के बयानों को उनके अपमान से जोड़ा। दूसरी ओर अखिलेश यादव भी पश्चिमी यूपी में संगठन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर की खींचतान को संभालने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में ABCD से XYZ तक पहुंची यह लड़ाई आने वाले चुनाव में बड़े राजनीतिक संदेश का रूप ले सकती है।